Film Review: जानिए कैसी है शाहरुख़ खान की फिल्म “रईस”

Film Review: जानिए कैसी है शाहरुख़ खान की फिल्म “रईस”

मुंबई: शाहरुख खान की फिल्म ‘रईस’ आपको 70 और 80 के दशक की टिपिकल मसाला फिल्मों की याद दिलाएगी, जिसका हीरो बुरा काम तो करता है लेकिन वो गरीबों का मसीहा भी है। एक पुलिसवाला है जो गंदी राजनीति के बीच भी अपना काम ईमानदारी से करता है। खूबसूरत हिरोइन है जो हीरो की परछाई बनकर रहती है। एक वफादार दोस्त है जो हीरो के लिए अपनी जान देने के लिए भी तैयार है। साथ ही कुछ बुरे लोग, सताई जनता, बेबस मां और खूब सारा एक्शन। इनके अलावा हेलन की तर्ज पर सनी लियोनी का एक आइटम सॉन्ग भी है जो खून-खराबे के बीच सुकून देता है।

फिल्म का निर्देशन राहुल ढोलकिया ने किया है. फिल्म में शाहरुख रईस आलम की भूमिका में हैं. उनके अलावा नवाजुद्दीन सिद्दीक़ी, माहिरा खान, अतुल कुलकर्णी, जिशान और नरेन्द्र झा महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं।

फिल्म की कहानी
यह कहानी 80 के दशक के गुजरात की है जहां स्कूल जाने वाला रईस (शाहरुख खान) और कबाड़ का काम करने वाली उसकी मां (शीबा चड्ढा) गरीबी की जिंदगी गुजर बसर करते हैं. हालांकि घर की ऐसी हालात देखकर पहले तो रईस देसी शराब का काम शुरू करता है लेकिन रेड पड़ने की वजह से काम में अड़चन आती है. फिर रईस अंग्रेजी शराब की दुकान पर (अतुल कुलकर्णी) का शागिर्द बन जाता है. दिमाग का तेज रईस एक वक्त के बाद खुद का धंधा शुरू करना चाहता है लेकिन इसके लिए उसका गुरु शर्त रखता है जिसके लिए रईस को 3 दिन का टाइम दिया जाता है। रईस इस शर्त को पूरा करने के लिए मूसा भाई के पास जाता है. मूसा भाई, रईस की स्टाइल से इम्प्रेस हो जाता है और उसकी हेल्प भी करता है. फिर कहानी में कई मोड़ आते हैं, वापसी पर रईस खुद का शराब का धंधा शुरू कर देता है, फिर “एस पी जयदीप अम्बालाल मजूमदार” (नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी) की वजह से शराब व्यापारियों पर कार्यवाही की जाती है लेकिन रईस हमेशा बच निकलता है बाकी की कहानी के लिए आपको सीनेमाघर जाना होगा।

फिल्म में एक्टिंग
शाहरुख खान की पॉवरपैक एक्टिंग और उसके साथ-साथ नवाजुद्दीन सिद्दीकी की मौजूदगी फिल्म को काफी दिलचस्प बनाती है. साथ ही फिल्म के बाकी सह कलाकार जैसे मोहम्मद जीशान अयूब, अतुल कुलकर्णी इत्यादि ने भी बढ़िया काम किया है। फिल्म के डायलॉग्स पहले से ही हिट हैं और जब भी वो फिल्म के दौरान आते हैं सीटियां और तालियां जरूर बजती हैं. ख़ास तौर पर शाहरुख के फैंस के लिए पूरा पैसा वसूल है।

फिल्म के लोकेशंस, सिनेमेटोग्राफी और बैकग्राउंड आपको 80 के दशक में ले जाकर बिठा ही देते हैं और फील भरपूर होती है। एक्शन सीक्वेंस भी कमाल के हैं साथ ही लैला मैं लैला वाला गीत भी कहानी में अच्छा मोड़ लाता है। शाहरुख खान के डायलॉग्स के साथ साथ नवाजुद्दीन की ‘कोई भी काम लिखित में लेने’ की स्टाइल काफी फेमस होगी. शाहरुख ने किरदार को कड़क बनाने के लिए बहुत ही ज्यादा प्रयास किया है जो स्क्रीन पर दिखाई देता है वहीँ नवाजुद्दीन सीरियस रोल में और भी जंचते हैं।