'टॉयलेट एक प्रेम कथा' बॉलीवुड में हिट फिल्मों का सूखा खत्म कर देगी । पढ़िए रिव्यू


Aug. 11, 2017, 5:52 p.m.

 

 

स्टार कास्ट - अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर, अनुपम खेर, दिव्येंदु शर्मा, सुधीर पांडे, 

डायरेक्टर - श्रीनारायण सिंह

रेटिंग- 3 स्टार

नीतू कुमार : स्वच्छ भारत मिशन और खुले में शौच जैसे टॉपिक डाक्यूमेंट्री फिल्म के हो सकते हैं लेकिन अक्षय एंड टीम ने इस टॉपिक पर एक मनोरंजक फिल्म बना दी है। 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' अच्छी फिल्म है।फिल्म उन्हीं चीजों को बड़े पर्दे पर दिखाती है जो हमारे आस पास हो रही हैं या फिर हम काफी समय से देखते आ रहे हैं । रियल लोकेशन, रियल एक्ट्रा कलाकार और किरदारों की वेशभूषा आपको ऐसा एहसास देंगे कि आप सचमुच मथुरा के किसी गांव में हैं। 'टॉयलेट-एक प्रेम कथा' पुरानी दकियानुसी सोच पर वार करती है। परंपरा के नाम पर घर के अंदर टॉयलेट नहीं बनवाएंगे लेकिन पवित्र नदियों को शौच करके अपवित्र करेंगे । महिलाओं को घूंघट में रहने को कहेंगे लेकिन शौच के लिए खुले में भेंजेंगे । फिल्म समाज की इस सोच पर भी हमला करती है। 

कहानी 

फिल्म के नाम से जाहिर है कि फिल्म टॉयलेट के ऊपर बनी है। शुरूआत ही गांव में महिलाओं की लोटा पार्टी से होती है। इसके बाद भूमि और अक्षय की एंट्री होती है। केशव ( अक्षय कुमार) की कुंडली में दोष है लिहाजा फिल्म के शुरूआत में ही उनकी शादी हो जाती है वो भी एक भैंस से । कुंडली में दोष की वजह से अक्षय को एक ऐसी लड़की तलाश है जिसके एक हाथ में दो अंगूठे हो लेकिन उन्हें प्यार हो जाता है जया (भूमि पेडनेकर) से। फिल्म में टॉयलेट इस कदर हावी है कि दोनों की पहली मुलाकात भी टॉयलेट के बाहर ही होती है। केशव और जया के बीच जल्द ही प्यार होता है और फिर शादी भी।शादी के दूसरे दिन जब गांव की महिलाएं जया को लोटा पार्टी के लिए आमंत्रित करती हैं तो पता लगता है कि उसके ससुराल में शौचालय  है ही नहीं । शौच के लिए सारी औरतों को  खेत में दिन निकलने से पहले जाना पड़ता है। ऐसे में जया साफ मना करती है कि वो खुले में  शौच नहीं जायेगी। पहले तो अक्षय इस समस्या के समाधान के लिए कई जुगाड़ लगाते हैं मसलन बीवी को रोज सुबह ट्रेन में टॉयलेट के लिए ले जाते हैं, एक फिल्म यूनिट का टॉयलेट चुरा लाते हैं लेकिन परेशानी बनी रहती है। केशव के पिता परंपरा के खिलाफ जाकर घर में टॉयलेट नहीं बनवाना चाहते । दलील ये दी जाती है कि जिस आंगन में तुलसी की पूजा होती है वहां शौचालय नहीं बन सकता।  पंचायत का भी  यही मानना है । केशव की पत्नी जया मायके चली जाती और फिर इसके बाद केशव शुरू करता है टॉयलेट के लिए संघर्ष।  

एक्टिंग 

टॉयलेट - एक प्रेम कथा के ट्रेलर से ही ये तय हो गया था कि अक्षय और भूमि पेडनेकर की दमदार एक्टिंग फिल्म की सबसे बड़ी खासियत होगी । दोनों के बीच गजब की केमिस्ट्री दिखती है। ऐसा लगता है मानों आप सचमुच एक पति-पत्नी की कहानी देख रहे हों। अक्षय कुमार अब एक्टिंग नहीं करते..किरदार में खुद को ढाल लेते हैं।  यहीं उन्होंने इस फिल्म में किया है। अक्षय कुमार की एक्टिंग हो या लुक दोनों में वो परफेक्ट रहे। फिल्म में अक्षय के डॉयलॉग्स भी प्रभावित करते थे। वहीं भूमि पेडनेकर में गजब का आत्मविश्वास है। अपनी दूसरी ही फिल्म में उन्होंने एक परिपक्व एक्ट्रेस की तरह का काम किया है। एक पढी लिखी तेजतर्रार लड़की के रोल में उन्होंने उम्दा एक्टिंग की है। फिल्म 'दम लगा के हईशा' में भी भूमि पेडनेकर की तारीफ हुई थी और यहां भी वो दर्शकों का ध्यान खींचने में कामयाब रही। फिल्म के दूसरे कलाकारों ने भी बेहतरीन काम किया है चाहे वो दिव्येंदु शर्मा हो या फिर सुधीर पांडे इन्होंने भी फिल्म को अपनी एक्टिंग से बढ़िया बना दिया है। 

डायरेक्शन और म्यूजिक 

'टॉयलेट - एक प्रेम कथा' के डायरेक्टर हैं श्री नारायण सिंह । उन्होंने जैसी फिल्म बनाई है उसे देखकर लगता नहीं कि ये उनकी पहली फिल्म है। फिल्म पर उनकी कमाल की पकड़ रही। उनके डायरेक्शन में परिपक्वता साफ नजर आती है। 'टॉयलेट एक प्रेम कथा' का म्यूजिक भी अच्छा है। फिल्म में संगीत और बेहतर हो सकता था। 'हंस मत पगली प्यार हो जाएगा' और 'गोरी तू लट्ठ मार गाना' सुनने और देखने दोनों में अच्छे लगते हैं 

फिल्म की कमियां 

'टॉयलेट - एक प्रेम कथा' की शुरूआत अच्छी है, इंटरवल तक फिल्म मनोरंजक है लेकिन उसके बाद कुछ सीन्स उबाऊ लगते हैं। करीब 2 घंटे 35 मिनट की फिल्म है ऐसे में दर्शक अक्षय के सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने वाले या फिर पत्नी से जुदाई वाले दृश्य बोझिल लगते हैं। फिल्म में स्क्रीनप्ले और कैमरावर्क और बेहतर हो सकता था।  

कैसा रहेगा बिजनेस ?

'टॉयलेट - एक प्रेम कथा' हिट फिल्म है। फिल्म का बिजनेस 100 करोड़ के आकड़े को जरूर पार करेगा और पहले दिन फिल्म का बिजनेस 15-20 करोड़ के बीच रहेगा। लगातार 4 दिन की छुट्टियां भी इस फिल्म को फायदा पहुंचाएंगी। अक्षय कुमार के दिन अच्छे चल रहे हैं  और उनकी ये फिल्म भी चल जाएगी। वो अपनी उम्र के हिसाब से फिल्में  और रोल चुन रहे हैं । लोग उन्हें इस फिल्म में पसंद करेंगे और 'टॉयलेट - एक प्रेम कथा' अक्षय की फिल्मोग्राफी को मजबूत करेगी। 

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