आर डी बर्मन को जब बॉलीवुड मेें नहीं मिल रहा था काम

1 years ago
दिल्ली ( 27 जून ) आज पंचम दा का जन्मदिन है। आर डी अब हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी घुनें उन्हें जिंदा रखे हुए है। आपको बता दे कि उनके लिए म्यूजिक का सफर हमेशा सुरीला और मीठा नहीं रहा। संगीत की दुनिया का ये बादशाह कई बार बुरे दौर से गुजरा । 1985 में रिलीज हुई थी फिल्म सागर.....सागर फ्लॉप हो गई और उसके बाद पूरे बॉलीवुड ने उनसे मुंह मोड़ लिया। आर डी बर्मन को फिल्में मिलनी बंद हो गई।अब बप्पी लाहिड़ी का वेस्टर्न म्यूजिक बॉलीवुड को पसंद आने लगा था। आर डी बर्मन का जादू फीका पड़ रहा था। प्रोड्यूसर नासिर हुसैन के साथ आर डी ने तीसरी मंजिल, कारवां, बहारों के सपने और यादों की बारात जैसी हिट फिल्में दी थी। लेकिन मंजिल मंजिल, जमाने को दिखाना है और जबरदस्त के फ्लॉप हो जाने के बाद नासिर हुसैन भी आर डी से मुंह मोड़ने लगे।नासिर हुसैन के बेटे मंसूर खान ने जब कयामत से कयामत तक बनाई तो आर डी बर्मन के बजाय नए संगीत कार आनंद मिलिंद को मौका दिया गया। इससे आर डी को बहुत बड़ा झटका लगा। इसके साथ ही उनको दूसरा झटका तब लगा जब निर्माता निर्देशक सुभाष घई ने फिल्म रामलखन में उनकी जगह पर लक्ष्मीकांत प्यारेलाल को साइन कर लिया। फिल्में मिलनी बंद हुई तो फाइनेशिंयल प्राब्लम भी आने लगी। लेकिन बुरे दौर में भी आर डी ने हार नहीं मानी और 80 के दशक में इजाजत, लिबास और परिंदा जैसी फिल्मों में अपने काम का लोहा मनवाया लेकिन आर डी के बुरे दौर में भी वाइफ आशा भोंसले उनकी हिंम्मत बढ़ाती रही.....आशा आर डी प्रेरणा थी... आशा भोंसले की आवाज के साथ आर डी ने सबसे ज्यादा एक्सपेरिमेंट किए थे। इनकी जोड़ी 70 के दशक में म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज कर रही थी म्यूजिक के सफर पर आर डी और आशा के सुर कुछ इस कदर मिले की दोनों ने 1980 में शादी कर ली.... आर डी अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन आशा के दिल में अब भी जिंदा है.....आशा के सुरों कायम हैं

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