कंघी से भी म्यूजिक निकाल लेते थे पंचम दा ...आज भी हिट है आर बर्मन के गाने

1 years ago
नीतू कुमार, दिल्ली, ( 27 जून ) पंचम दा यानि आर डी बर्मन को एक्सपेरिमेंट करने में बड़ा मजा आता था। पूरब और पश्चिम के म्यूजिक को इस तरह मिक्स करते थे कि उनके म्यूजिक का कॉकटेल नशा बन जाता था । आर डी बर्मन बॉलीवुड के पहले ऐसे म्यूजिक डायरेक्टर थे जिन्होंने लोक संगीत को हिंदी सिनेमा में पॉपुलर बनाया। लोक संगीत को इस तरह से बॉलीवुड में पिरोया की वो गीत अमर हो गए ।  पहाड़ी म्यूजिक को भी पंचम दा ने बॉलीवुड के गानों में खूब इस्तेमाल किया ....उनकी कई फिल्मो में राग पहाड़ी सुनने को मिला और आज भी उनके गीतों को पसंद किया जाता है फिल्म पड़ोसन के एक गाने में आर डी बर्मन ने म्यूजिक के लिए कंघी का इस्तेमाल किया....और उनका ये एक्सपेरिमेंट भी गजब का रहा।  1960 से लेकर 1990 तक बॉलीवुड आर डी के धुनों में डूबा रहा। आर डी बर्मन अपनी फिल्मों हर तरह की म्यूजिक देते रहे ...कभी क्लासिकल की झड़ी लगा देते रैना बीती जाए श्याम ना आए  तो कभी उनकी फिल्मों में हल्के फुल्के गाने गजब का समां बांध देते और हर जुबां पर चढ़ जाते थे। आर डी बर्मन ने सदाबहार गाने दिए...हल्के फुल्के गानों के वो मास्टर थे तो गंभीर गानों में भी वो लाजवाब थे। फिल्म इजाजत में उन्होंने अपना एक अलग फन दिखाया  जिस दौर में बॉलीवुड क्लासिकल म्यूजिक पर डिपेंड था ....उस दौर में पंचम दा ने वेस्टर्न म्यूजिक की हवा बहाई और देश की यंग जेनेरेशन के वो पहली पसंद बन गए । आर डी का संगीत सीधे दिल को छूता था। हर फन में माहिर थे वो....जो भी गीत कंपोज करते वो हरदिल अजीज बन जाता ..हालांकि ये हैरत की बात है कि 70 के दशक में जब आर डी पूरी तरह से बॉलीवुड पर छाए हुए थे उस दौर में उन्हें एक बार भी अवॉर्ड नहीं मिला। आर डी के संगीत को पहला अवॉर्ड 1983 में फिल्म सनम तेरी कसम के लिए मिला । 1984 में फिल्म मासूम के लिए भी पंचम दा का संगीत सराहा गया। इस फिल्म के एक गाने लकड़ी की काठी में आर डी वर्मन ने स्केल बजा कर म्यूजिक दिया था। आर डी बर्मन को इस फिल्म के लिए भी अवॉर्ड मिला  आर डी के संगीत को तीसरी  बार तब सराहना मिली जब वो इस दुनिया से रूखसत हो गए थे। 1995 में पंचम दा को तीसरी बार अवॉर्ड मिला। 1942 अ लव स्टोरी के लिए उन्हें ये अवॉर्ड दिया गया लेकिन अवॉर्ड लेने के लिए पंचम दा हमारे बीच नहीं थे । आर डी बर्मन भले ही आज हमारे बीच नहीं है लेकिन उनका संगीत उन्हें अमर बनाता है। पंचम दा के सुर कभी भूले नहीं जा सकते....उनके बिना बॉलीवुड का संगीत सूना है

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