जिसे 10 रुपये भीख में मिली थी वो सुपर स्टार बन गया, जानिए कहानी डिस्को डांसर की

1 years ago
दिल्ली ( 16 जून ) वो 1970 का दौर था बंगाल में नक्सलवाद अपने उफान पर था और इसी नक्सल आंदोलन का हिस्सा था एक बंगाली नौजवान जिसका नाम था गौरांग चक्रवर्ती लेकिन जल्द ही जंगल में हथियार लेकर भटकने वाले गौरांग की किस्मत बदल गई और साथ ही बदल गया उसका नाम.का नया मुकाम था फिल्मों की दुनिया और उसका नया नाम था मिथुन चक्रवर्ती। पुणे का फिल्म और टेलीविजन इंस्टीट्यूट था मिथुन की पहली मंज़िल । डिस्को डांसर ने वहीं पर सीखा था एक्टिंग का पहला पाठ लेकिन तब खुद मिथुन को भी ये उम्मीद नहीं थी कि वो कभी हीरो बन पाएंगे  क्योंकि वो उस ज़माने के तमाम हीरो से अलग थे उनका रंग बहुत सांवला था,हिंदी उन्हे आती नहीं थी उपर से अटपटा सा नाम गौरांग।  मिथुन बाकी लोगों से अलग थे... लेकिन उनमें एक चीज़ ऐसी थी जो उस दौर के किसी हीरो के पास नहीं थी और वो था उनका डांस।  मिथुन हॉस्टल मे रह कर घंटों तक डांस की प्रैक्टिस करते, वो जानते थे कि ये डांस ही उन्हे उस मुकाम पर पहुंचा सकता है जिसकी उन्हे तलाश थी। मिथुन एक बहुत आम से लड़के थे। शायद ही उन पर किसी का ध्यान जाता हो... लेकिन एक शख्स ऐसा था जिसने मिथुन के अंदर की आग को पहली ही झलक में पहचान लिया था और वो शख्स था मृणाल सेन मृणाल सेन उस दौर में एक आदिवासी नौजवान की कहानी पर एक फिल्म मृग्या बना रहे थ. जिसके लिए उन्हे एक लंबे, चौड़े और सांवले नौजवान की तलाश थी... और तभी मृणाल सेन को याद आया मिथुन का चेहरा, जिसे उन्होने पुणे में देखा था फिर किसी तरह मृणाल ने मिथुन को ढूंढ निकाला और उन्हें मृग्या में काम दिया, इस तरह फिल्मों में मिथुन की एंट्री हो गई . लेकिन क्या आप जानते हैं कि आज करोडों रूपये कमाने वाले मिथुन दा को मृग्या के लिए कितने रूपये मिले थे... तीन हज़ार  रूपये फीस और एक हज़ार रूपये बख्शिश... मृग्या रीलीज़ हो चुकी थी  लेकिन मिथुन गुमनामी की ज़िंदगी जी रहे थे  ये उनके ज़िंदगी के सबसे बुरे दिन थे...और तभी हुआ राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का ऐलान मिथुन को मृग्या के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता घोषित किया गया लेकिन उस दौर में फुटपाथ पर भूख से कराह रहे मिथुन को इसकी ख़बर तक नहीं लगी । फिर तब फिल्म मैगजीन मायापुरी के एक रिपोर्टर ने मिथुन का इंटरव्यू लेना चाहा तो मिथुन ने उनसे कहा कि पहले खाना खिलाओ तब इंटरव्यू दूंगा सोचिए आज मिथुन चार-चार फाइव स्टार होटलों के मालिक हैं लेकिन उस दौर में मिथुन के पास पेट भरने के लिए एक रोटी तक नहीं थी। मिथुन के पास कोई फिल्म नहीं थी... लिहाज़ा उन्होने अपने सबसे बड़े हुनर को अपना पेट पालने के लिए दांव पर लगा दिया... उन्होने अपना नया नाम रखा - राना रेज... और राना रेज के नाम से मुंबई के गली मोहल्लों में डांस शो करने लगे...और उनका शो हिट होने लगा । आज बतौर हीरो मिथुन के नाम पर सबसे ज्यादा 380 फिल्में हैं... लेकिन उस दौर में पेट पालने के लिए मिथुन को एक्स्ट्रा कलाकार बनना पड़ा। अमिताभ और रेखा की फिल्म दो अंजाने में मिथुन ने एक सड़कछाप गुंडे का किरदार निभाया था.जो पूरी फिल्म में सिर्फ 85 सेकेंड के लिए दिखाई देता है। मिथुन ने कई फिल्मों में छोटे मोटे रोल किए लेकिन उन्हे पहली बार डांस करने का मौका मिला फिल्म मुक्ति में.। मुक्ति में भी उनका रोल दो मिनट का था लेकिन इस पूरे दो मिनट तक मिथुन सिर्फ नाचते रहे, और इसी सीन से उन्होने बॉलीवुड को दिखा दिया कि एक सुपरस्टार का जन्म हो चुका है।   बी सुभाष की फिल्म डिस्को डांसर की कहानी मिथुन की ज़िंदगी के बेहद करीब थी। इस फिल्म का हीरो फुटपाथ से उठकर एक बहुत बड़ा डांसर बन जाता है... ठीक मिथुन की तरह। डिस्को डांसर इतनी हिट हई की इसने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए... यहां तक कि विदेशों में सुपरहिट होने वाली ये पहली हिंदुस्तानी फिल्म थी। उस दौर में सारे नौजवान मिथुन के डांस की नकल करने लगे थे यहां तक कि एंग्री यंग मैन अमिताभ को अपनी इमेज बदलकर मिथुन की स्टाइल में, मिथुन जैसे कपड़े पहन कर याराना में डिस्को करना पड़ा। सिर्फ डांस ही नहीं मिथुन पूरे हिंदुस्तान का स्टाइल ऑइकन बन गए थे... उनके एक्शन सीन, उनकी बॉडी और उनके कराटे नौजवानों को दीवाना बना रहे थे...मिथुन पहले हीरो थे जिनकी वजह से भारत में फिटनेस क्रेज़ बढ़ा मिथुन ही मार्शल आर्ट, नानचाकू, और कराटे को सबसे पहले इंडिया में लेकर आए। डिस्को डांसर के बाद मिथुन ने हिट फिल्मों की झड़ी लगा दी... मिथुन की फिल्म का मतलब होता था बॉक्स ऑफिस पर भीड़... और इसकी सबसे बड़ी मिसाल है प्यार झुकता नहीं.। प्यार झुकता नहीं ने बॉक्स ऑफिस पर सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए... डांस और एक्शन के बाद अब मिथुन रोमांटिक हीरो के तौर पर भी जम गए.। अपने बुरे वक्त में मिथुन ने अमिताभ के सामने बतौर एकस्ट्रा कलाकार काम किया था लेकिन अब वक्त बदल गया था... कहते हैं कि फिल्म अग्निपथ में खुद अमिताभ ने उन्हे अपने साथ काम करने के लिए मनाया। कृष्णन अय्यर एम ए के किरदार के लिए मिथुन को 1991 में फिल्म फेयर अवार्ड मिला.लेकिन ये तो शुरुआत थी अगले ही साल मिथुन को बंगाली फिल्म ताहेदर कथा के लिए दूसरा नेशनल अवार्ड मिला। कामयाबी मिथुन के पीछे भाग रही थी और इसी दौर में मिथुन ने लिया ऐसा फैसला जो उनके जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पाइंट साबित हुआ। मिथुन की नई मंजिल थी ऊंटी... यहां उन्होने होटल मोनार्क की नींव रखी, लेकिन फिल्मों को अलविदा नहीं कहा...मिथुन ने ऊंटी में डायरेक्टर और प्रोड्यूसर्स को बुलाकर फिल्में करना शुरु कर दीं... इससे दो फायदे होते, एक तो मिथुन की होटल हमेशा भरी रहती और प्रोड्यूसर की फिल्म जल्दी और कम बजट मे बन जाती... तभी तो इसे नाम दिया गया था "मिथुन फिल्म इंडस्ट्री".. 380 फिल्में करने के बाद भी मिथुन की एक्टिंग की भूख अभी खत्म नहीं हुई है... गुरू हो गोलमाल हो या हाउसफुल वो जिस फिल्म में आते हैं छा जाते हैं। डांस इंडिया डांस जैसे रिएलिटी शोज से लेकर राजनीति में भी मिथुन दा अपने पैर जमा चुके हैं...वो पश्चिम बंगाल से तृणमुल कांग्रेस की तरफ से राज्यसभा सांसद रहें ... इस मुकाम तक पहुंचने के लिए मिथुन दा ने 40 साल तक तपस्या की है... जो आज भी बॉलीवुड के हर सितारे के लिए एक मिसाल है। पिछले साल ही मिथुन दा ने अपनी ख़राब सेहत की वजह से राज्यसभा सांसद पद से इस्तीफ़ा दिया और उसके बाद वो ज़्यादा से ज़्यादा वक्त अपनी परिवार को दे रहे हैं।    

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