बर्थडे स्पेशल : क्या आप किशोर कुमार के बारे में ये जानते हैं?

3 years ago

मुंबई (4th August): सदाबहार गायक किशोर कुमार की आज 86वीं जयंती है। किशोर की पहचान बेशक महान गायक के तौर पर रही लेकिन वो हरफनमौला कलाकार थे। उन्होंने कई फिल्मों में अपनी बेहतरीन अभिनय प्रतिभा से भी लोगों को रू-ब-रू कराया। साथ ही फिल्मों का निर्माण, निर्देशन तथा संगीत निर्देशन भी किया। 4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में जन्मे किशोर कुमार का असल नाम आभास कुमार गांगुली था।

1. महान अभिनेता एवं गायक केएल सहगल के गानो से प्रभावित किशोर कुमार उनकी ही तरह के गायक बनना चाहते थे। सहगल से मिलने की चाह लिये किशोर कुमार 18 वर्ष की उम्र में मुंबई पहुंचे लेकिन उनकी इच्छा पूरी नहीं हो पायी। उस समय तक उनके बड़े भाई अशोक कुमार बतौर अभिनेता अपनी पहचान बना चुके थे।

2. किशोर के बड़े भाई अशोक कुमार चाहते थे कि किशोर नायक के रुप मे अपनी पहचान बनाये, लेकिन खुद किशोर कुमार को अदाकारी की बजाय पार्श्व गायक बनने की चाह थी। जबकि उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा कभी किसी से नहीं ली थी।

3. किशोर कुमार ने वर्ष 1951 मे बतौर मुख्य अभिनेता फिल्म 'आंदोलन' से अपने कैरियर की शुरुआत की, लेकिन इस फिल्म से दर्शको के बीच वह अपनी पहचान नहीं बना सके। वर्ष 1953 मे प्रदर्शित फिल्म 'लड़की' बतौर अभिनेता उनके कैरियर की पहली हिट फिल्म थी।

4. राजेश खन्ना समेत बॉलिवुड के तमाम दिग्गज नायकों को प्लेबैक देने वाले किशोर कुमार कभी बड़े पर्दे पर खुद मोहम्मद रफ़ी की आवाज़ में गाते दिखे थे। फिल्म 'रागिनी' में 'मन मोरा बावरा...' और 'शरारत' में 'अजब है दास्तां तेरी यह ज़िंदगी...' किशोर के ऐसे गीत हैं, जिन्हें मोहम्मद रफी ने किशोर कुमार के लिए गाया।

5. किशोर कुमार जब भी स्टेज शो करते थे, सबसे पहले हाथ जोड़कर संबोधन करते थे-'मेरे दादा-दादियों, मेरे नाना-नानियों, मेरे भाई-बहनों, सबको खंडवे वाले किशोर कुमार का राम-राम, नमस्कार।" किशोर कुमार आम बोलचाल में अक्सर 'बागड़ू' शब्द का इस्तेमाल करते थे।

6. किशोर कुमार जिंदगीभर कस्बाई चरित्र के भोले मानस बने रहे। मुंबई की भीड़-भाड़, पार्टियाँ और ग्लैमर के चेहरों में वे कभी शामिल नहीं हो पाए, इसलिए उनकी आखिरी इच्छा थी कि खंडवा में ही उनका अंतिम संस्कार किया जाए। इस इच्छा को पूरा किया गया। वे कहा करते थे-'फिल्मों से संन्यास लेने के बाद वे खंडवा में ही बस जाएँगे और रोजाना दूध-जलेबी खाएँगे।' किशोर ने अपनी दूसरी बीवी मधुबाला से शादी के बाद मजाक में कहा था-'मैं दर्जनभर बच्चे पैदा कर खंडवा की सड़कों पर उनके साथ घूमना चाहता हूँ.'

7. किशोर कुमार के भाग्य का सितारा 1969 में आई फिल्म आराधना से चमका, इसमें गाए गीत रूप तेरा मस्ताना के लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड भी दिया गया।

8. हरदिल अजीज कलाकार किशोर कुमार कई बार विवादों का भी शिकार हुए। सन 1975 में देश में लगाये गये आपातकाल के दौरान दिल्ली में एक सांस्कृतिक आयोजन में उन्हें गाने का न्यौता मिला। किशोर कुमार ने पारिश्रमिक मांगा तो आकाशवाणी और दूरदर्शन पर उनके गायन को प्रतिबंधित कर दिया गया। आपातकाल हटने के बाद पांच जनवरी 1977 को उनका पहला गाना बजा दुखी मन 'मेरा सुनो मेरा कहना, जहां नहीं चैना वहां नहीं रहना।'

9. किशोर कुमार ने अपने संपूर्ण फिल्मी कैरियर मे 600 से भी अधिक हिंदी फिल्मों के लिये अपना स्वर दिया। उन्होंने बंगला, मराठी, गुजराती, कन्नड, भोजपुरी और उडिया फिल्मों में भी अपनी दिलकश आवाज के जरिये श्रोताओं को भाव विभोर किया।

10. वर्ष 1986 में किशोर को पहला हार्ट अटैक आया। हालांकि समय रहते चिकित्सा सहायता मिलने से किशोर कुमार बच गए, परन्तु वर्ष 1987 में दुबारा हार्ट अटैक आने के कारण 13 अक्टूबर 1987 को 58 वर्ष की उम्र में उनका देहावसान हो गया।

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