बायोपिक आने से पहले संजय दत्‍त ने यह क्‍या बोल दिया!

2 years ago

मुंबई : बीते दिनों बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त ने अपने दिल की बात एक इंटरव्यू में की, और अपने सारे दिल के राज़ खोल दिये। उन्‍होंने बताया कि, इस बार जेल से बाहर आने के बाद संजय दत्त ख़ुद को पूरी तरह से फ्री मैन कह सकते है। इसीलिए अब तक जिन-जिन बातों पर संजय ने कभी कुछ नहीं बोला, उन सब बातों को वो अब दुनिया के सामने रख रहे है। ऐसे ही एक इंटरव्यू में संजय दत्त ने अपने दिल की बात की हैऔर कई सवालों के जवाब दिए। जहां सबसे पहला और सबसे बड़ा सवाल था उनके DRUG ADDICTION का, इस शर्मसार सवाल का जवाब भी संजय ने बहुत ही बेबाकी से दिया। (दुनिया में ऐसी कोई ड्रग्स नहीं जो मैंने न ली हो...जब मेरे पापा मुझे अमेरिका में रिहैब लेकर गए थे...तब उन्होंने मुझे ड्रग्स की एक लिस्ट दी थी और मैं सारी ड्र्ग्स पर टीक किया था...क्योंकि मैंने वो सारे ड्रग्स लिए हुए थे)ड्रग्स पर संजय का ये कंफैशन यही नहीं ख़त्म होता, एक वक्त में ड्र्ग्स की लत की वजह से बरबाद हो चुके संजय ने यंगस्टर्स को ये एडवाइज़ दी। (मैंने ड्रग्स अपनी फैमिली के लिए नहीं छोड़ी...मैं इसीलिए छोड़ी क्योंकि मैं उससे बाहर आना चाहता था...मैं ऐसी लाइफ नहीं जीना चाहता था...मैं यंगस्टर्स को यही कहूंगा कि लाइफ से प्यार करो, अपने काम से प्यार करों, अपनी फैमिली से प्यार करो...ये सब चीज़े कोकीन से ज्यादा अच्छी है)जेल में बिताए अपने ज़िन्दगी को भी संजय भूले नहीं है, उन्हें याद करते हुए संजय ने बताया कि तीन साल तक उन्होंने अपने बच्चों को शक्ल तक नहीं देखी थी। उनकी वाइफ मान्यता बच्चों को जेल लाने की बात करती भी तो संजय मना कर देते थे। क्योंकि वो अपने बच्चों के सामने जेल के कपड़ों में नहीं आना चाहते थे, महीने में दो बार अपने बच्चों से फोन पर बात करने वाले संजय ने उन्हें यही बताया कि वो पहाड़ों में शूटिंग कर रहे है और वहां कनेक्शन लूज़ होने की वजह वो ज्य़ादा बात नहीं कर पाते। पूणे जेल में बिताए अपने वक्त को संजय ने शेयर करते हुए बताया कि जेल में बहुत मक्खियां है, जो उनके खाने में भी गिर जाती थी लेकिन वो दाल से मक्खी निकाल कर दाल पी जाते थे। संजय के मुताबिक उन्होंने जेल में कभी किसी चीज़ की होप नहीं रखी, और वो मानते है कि इसीलिए उनका जेल का वक्त शायद आराम से कट गया। अब संजय दुनिया घूमकर अपनी कहानी सबको बताना चाहते है। उनके मुताबिक उनकी लाइफ माउट ऐवरेस्ट पर चढ़ने जैसी थी, जिससे वो बार-बार गिरे और बार-बार उठे।

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