मीना कुमारी: दर्द में लिपटी ऐसी दास्तां जिसे ना देख पाया कोई...

3 years ago

नई दिल्‍ली (1st April): आंखों से टपकती मासूमियत, चेहरे पर जज्बात की जिंदा लकीरें, वो नशीली सी तबियत। मीना कुमारी की जिंदगी दर्द में लिपटी ऐसी ही दास्तां है जिसे जमाना कम ही जानता है। जमाने ने उनके बिलखते हुए किरदार देखे, तड़पते हुए किरदारों में मोहब्बत की प्यास देखी लेकिन इनके पीछे का दर्द कहीं दबा रह गया।

''अच्छे लगे दिल को तेरे गिले शिकवे भी लेकिन तू दिल ही हार गुजरा और हम जान हार गुजरे''

मीना कुमारी को आप जितना जानते हैं उससे कहीं ज्यादा ये शेर बयां करते हैं उनकी शख्सियत के बारे में। मोहब्बत ने उन्हें तराशा तो शराब ने बर्बाद कर दिया। 40 साल की उम्र तक आते-आते जिंदगी बेमानी हो गई। जो जाम कभी जिंदगी के गम हजम करते थे, वो जाम मौत का पैगाम बन गया। वो बदनाम भी हुई मगर वो किरदार अब भी पाकिजा है।

''दिल सा जब साथी पाया, बेचैनी भी वो साथ ले आया''

अपनी जिंदगी में कमाल अमरोही की मौजूदगी को कुछ इस अंदाज में बयां किया था मीना कुमारी ने। इसी मोहब्बत ने मीना कुमारी की दिल की महफिल सजाई तो इसी मोहब्बत ने जिंदगी जहन्नुम से भी बदतर कर दी। जाने कहां कसर रह गई कि मीना कुमारी की रुह ता उम्र मोहब्बत के लिए प्यासी रह गई।जब कमाल अमरोही से मोहब्बत हुई तब ऐसे अंजाम का अंदाजा तक नहीं था उन्हें।

मीना कुमारी को कमाल अमरोही से मोहब्बत हुई और शादी भी कर ली लेकिन जिंदगी अब पहली सी नहीं रही। पति और उनके सेक्रेटरी बाकिर अली का खौफ इतना ज्यादा था कि मीना कुमारी शूटिंग में जरा सी देर से भी घबरा जाती थी। एक बार साहब बीबी और गुलाम के डायेरक्टर अबरार अली से मीना कुमारी ने कहा था कि मियां समझा करो घर जाने में देर होगी तो बड़ी पिटाई होगी, ऐसे कई किस्से है मीना कुमारी पर सितम के।

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