सेंसर बोर्ड को लेकर सामने आई रिपोर्ट, उठे कई अहम सवाल!

2 years ago

मुंबई : सेंसर बोर्ड के सुधार के लिए बनायी गयी कमेटी ने अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंप दी है। इस कमेटी में फिल्मकार राकेश ओमप्रकाश मेहरा, एडमैन पियूष पांडे और फिल्म क्रिटिक भावनना सोमाया हैं। केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने सेंसर बोर्ड पर उठे कई विवादों के बाद इस कमेटी का गठन किया था। कमेटी का गठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर किया गया है। यह कमेटी मुख्य रूप से फिल्मों को दिये जाने वाले सर्टिफिकेट के बारे में अपनी रिपोर्ट देगी। इसके साथ ही यह पैनल सिनेमेटोग्रफी के बारे में भी अपनी राय देगा।

WATCH : बोल्डनेस की हदें पार की इस फिल्म ने! मोशन पोस्टर देख लोगों ने पूछा कहां है सेंसर बोर्ड?

आपको बता दें कि फिल्मों में कई शब्दों पर लगे बैन के बाद सेंसर बोर्ड को आलोचना का सामना करना पड़ा था। इसके साथ ही ऑन स्क्रीन किस की अवधि को लेकर भी विवाद हुआ था। जिसके बाद यह कमेटी बनाई गई थी। अब इस कमेटी की रिपोर्ट पेश की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बोर्ड का काम फिल्म को सर्टिफिकेट देने का होना चाहिए ना कि कैंची चलाने का।

‘हेट स्टोरी 3’ में ‘भगवान’, ‘संभोग’, ‘बास्..र्ड’ शब्दों पर सेंसर बोर्ड की कैंची!

फिल्म पर कैंची चलाने से बेहतर है कि उसे सर्टिफिकेट ही अलग दर्जे का दिया जाए। इससे फिल्मकार की रचनात्मकता भी बनी रहेगी और बोर्ड अपना काम भी कर सकेगा। बेनेगल कमिटी ने चार महीने में अपनी पहली रिपोर्ट दी है। रिपोर्ट का अगला और आखिरी हिस्सा 20 जून तक सरकार को सौंप दिया जाएगा।रिपोर्ट में कहा गया है कि फिल्मों को सर्टिफिकेट देने के नाम पर उसे मनमाने ढंग से सेंसर करने का काम बोर्ड का नहीं होना चाहिए।

‘क्या कूल हैं हम 3’ में अश्लीलता की सारी हदें पार, सेंसर बोर्ड का कड़ा रुख़

फिल्म रिलीज हो और अपने मूल रूप में थियेटर तक पहुंचे, लेकिन उसका सर्टिफिकेट अलग होगा और जाहिर है कि दर्शक वर्ग भी। लिहाजा श्याम बेनेगल कमिटी ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अधिकार क्षेत्र और कामकाज के तौर तरीकों पर अपनी रिपोर्ट में ये सारी बातें विस्तार से कही हैं।

सेंसर बोर्ड ने ‘जय गंगाजल’ से ‘साला’ शब्द बीप करने को कहा, प्रकाश झा बोले- ये तो हद है

सूचना और प्रसारण मंत्री अरुण जेटली को सौंपी गई रिपोर्ट में कमिटी ने साफ कहा है कि फिल्मों को यू, यूए और ए सर्टिफिकेट के मौजूदा खांचे के अलावा एक दो दर्जे और बढ़ाए जा सकते हैं। लेकिन फिल्मकार की रचनात्मकता पर कैंची चलाना उचित नहीं है। एडल्ट श्रेणी की फिल्मों को और सख्ती का सर्टिफिकेट यानी 'एडल्ट विद कॉशन' का सर्टिफिकेट दिया जा सकता है।

 

रिपोर्ट पर सरकार का कहना है कि जल्दी ही इस बारे में समुचित कार्रवाई की जाएगी ताकि देश में फिल्म निर्माण और रिलीज को सरल, सहज और सुचारू बनाया जा सके. सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि हमारी कोशिश है कि हम जल्दी ही इस पर अमल करने की दिशा में आगे बढ़ें.

Related Posts