2 अगस्त को हुआ था अमिताभ का पुनर्जन्म, कूली के सेट पर घायल बिग बी को दुआओं ने बचाया था

10 months ago

26 जुलाई 1982 बैंगलोर के भारती यूनिवर्सिटी की लाइब्रेरी में कूली फ़िल्म की शूटिंग का शेड्यूल तय था। लाइटिंग और शूटिंग की तैयारियों में वक्त थोड़ा ज़्यादा लग रहा था। दोपहर हो चुकी थी.पुनीत इस्सर और अमिताभ बच्चन का एक फाइट सीन शूट किया जाना थ। ये सीन फ़िल्म के क्लाइमेक्स का पार्ट था। इस फाइट सीन को - फाइट डायरेक्टर - पप्पू वर्मा को शूट करना था । बिग बी और पुनीत इस्सर, को ये सीन पूरी तरह समझाया गया.। इसकी बारीकियां बताई गईं.। अपने तमाम दूसरे एक्शन सीन्स की तरह बिग बी ये सीन्स भी खुद ही शूट करना चाहते थे.। पुनीत इस्सर और अमिताभ बच्चन दोनों ने फाइट सीन के लिए कई बार रिहर्सल की। रिहर्सल के बाद बारी थी फाइनल शूटिंग की ।

रिहर्सल्स में भी सब ठीक था, और फाइनल शॉट की बारी आई। इस सीन के लिए शाट देने के लिए अमिताभ और पुनीत इस्सर रेडी थे। फाइट डायरेक्टर की आवाज आई- रोल कैमरा ...एक्शन। सीन के मुताबिक पुनीत इस्सर और उसके गुंडे कुलियों के साथ जमकर मारपीट करते हैं। उसी दौरान उन्हें बचाने पहुंचते हैं अमिताभ बच्चन। फ़िर अमिताभ बच्चन और पुनीत इस्सर के बीच फाइट शुरू हुई। पहले अमिताभ बच्चन पुनीत इस्सर को कई घूंस जड़ते हैं-उसके बाद पुनीत इस्सर का एक जोरदार घूंसा अमिताभ के पेट में लगता है।घूंसा लगते ही अमिताभ बच्चन पलटकर मेज से टकरा गए और फर्श पर गिर पड़े।

ये टेक ओके था, अमिताभ फर्श पर गिरे हुए थे, किसी को अंदाज़ा तक नहीं था, कि वहां क्या हो गया है । अमिताभ उठे, तो चलने की कोशिश की, तो उन्हे दर्द हुए...जैसे-तैसे एक कुर्सी तक पहुंचे और वहीं बैठ गए...पूरा क्रू अगले शॉट की तैयारी करने लगा । इस बीच बिग बी ने मनमोहन देसाई को बताया कि उन्हें घूंसा गलत जगह पर लग गया है..जिसकी वजह से वो दर्द में हैं...। दर्द हो रहा है।मनमोहन देसाई ने बिग बी शर्ट उठाकर देखा, तो वहां चोट का कोई भी निशान नहीं था, लेकिन अमिताभ के चेहरे से दर्द ही दर्द छलक रहा था। उस दिन शूटिंग वहीं रोक दी गई।

कूली के विलेन पुनीत इस्सर का घूंसा अमिताभ बच्चन को वाकई गलत जगह लगा था..। दर्द झेलते हुए भी अमिताभ तकरीबन आधे घंटे तक कुली के सेट पर रहे..फ़िर होटल वेस्ट ऐंड चले गए, जहां जया और उनके रुकने का इंतज़ाम किया गया थ.। इस बीच जया ने घर पर अजिताभ को अमिताभ के तबीयत खराब होने की ख़बर दे दी थी.। हादसे के तकरीबन 20 घंटे बाद अमिताभ बच्चन को बैंगलोर के फिलोमिना अस्पताल में भर्ती कराया गया..। कुली फ़िल्म के फाइट सीन की शूटिंग के दौरान अमिताभ के पेट में लगे पुनीत इस्सर का घूंसे से उनके पेट की आंत फट गई थी। आंत फटने की वजह से पेट के बाहर सूजन थी-और पेट के अंदर खून की मवाद यानी पस बन रही थी। लेकिन ये बात एक्सपर्ट नहीं समझ पाए थे।

मुंबई से तेजी बच्चन के साथ तीन स्पेशलिस्ट डॉक्टरों बैंगलोर पहुंच रहे थे, लेकिन इसी बीच मशहूर यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर एच एस भट्ट वहां बिग बी के लिए किसी फ़रिश्ते की तरह पहुंचे.। उन्होने अमिताभ की एक्सरे रिपोर्ट देखते ही बता दिया कि मरीज की आंत फट गई है..। इस खुलासे ने सभी के पैरों तले जमीन खिसका दी। फिलोमिना अस्पताल के डॉक्टर जिसे मामूली चोट समझ रहे थे-उसी चोट ने करोड़ों दिलों पर राज करने वाले एक सुपर स्टार को मौत के मुंह में पहुंचा दिया था। डॉक्टर भट्ट ने बच्चन परिवार को साफ-साफ बता दिया था कि ऑपरेशन में और ज्यादा देरी हुई-तो अमिताभ की जिंदगी बचा पाना नामुमकिन हो जाएगा ।

आधे घंटे के अंदर बिग बी ऑपरेशन थियेटर के अंदर थे...डॉक्टर ने उनका पेट खोला, तो ख़ून और मवाद फव्वारे की तरह बाहर निकला..। उनकी आंत को टांके लगाकर जोड़ा गया। और भगवान की प्रार्थना की जाने लगी...। उधर डायरेक्टर मनमोहन देसाई भी मंदिर में जाकर बिग बी की सही होने की मुराद मांगने लगे। आपरेशन हुआ तो सही, लेकिन अमिताभ की सेहत सुधरने की जगह बिगड़ने लगी...। पीलिया और निमोनिया होने की भी संभावना दिखने लगी, जो कि इस हालत में जानलेवा थी..। नतीजा बिग बी को मुंबई लाने की तैयारी होने लगी...।

इस बीच तक अख़बारों के ज़रिए अमिताभ की बीमारी की ख़बर लोगों तक पहुंच गई थी...। फिलोमिना अस्पताल के बाहर मीडिया और अमिताभ बच्चन के फैन्स की भीड़ जुट गई थी। उधर मनमोहन देसाई ने एयर इंडिया से बात करके अमिताभ बच्चन के लिए फ्लाइट के अंदर ही आईसीयू का बंदोबस्त कराया ।और अस्पताल के सामने की भीड़ से बचने के लिए उन्होने बिग बी की एंबुलेस को पीछे के दरवाजे से बाहर निकाला। आधी रात को एयर इंडिया का विमान अमिताभ को लेकर बैंगलोर से मुंबई के लिए उड़ा..।