चुनाव में दो हिस्सों में बंटा बॉलीवुड, अब 900 कलाकारों ने बीजेपी को वोट देने की अपील !

2 weeks ago



लोकसभा चुनाव का आज पहला चरण है। देशभर में चुनावी माहौल बना हुआ है ऐसे में बॉलीवुड भी दो भाग में बंट गई हैं। पिछले हफ्ते 600 थिएटर और बॉलीवुड के कलाकारों ने अपील की थी कि डेमोक्रेसी को बचाने के लिए बीजेपी को वोट ना करें और अब 900 बॉलीवुड एक्टर्स ने लेटर जारी कर देश से अपील की है कि मजबूत भारत के लिए बीजेपी को वोट करें। इस मुद्दे पर बॉलीवुड दो फाड़ हो गई है। 




विवेक ओबेरॉय, शंकर महादेवन, हंस राज हंस, पंडित जसराज, अनुराधा पौडवाल, राहुल रॉय, मालिनी अवस्थी, रीता गांगुली, पायल रोहतगी और कोइना मित्रा समेत 900 कलाकार बीज भाजपा के सपोर्ट में आए हैं। इन सभी कलाकारों ने साझा बयान जारी कर बीजेपी को वोट देने की अपील की है। बयान में कहा गया- 'देश को मजबूत सरकार चाहिए, मजबूर नहीं।' 



कलाकारों ने लेटर में लिखा है कि , ‘‘हमारा दृढ़ विश्वास है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार जारी रहना समय की जरूरत है। हमारे सामने जब आतंकवाद जैसी चुनौतियां हैं, ऐसे में हमें मजबूत सरकार चाहिए, मजबूर सरकार नहीं। इसलिए मौजूदा सरकार चलती रहनी चाहिए।’  
बॉलीवुड सितारों ने अपील में कहा है कि लोग अपना कीमती वोट बिना किसी दबाव के दें । पिछले पांच साल के दौरान, भारत ने एक ऐसी सरकार देखी है जिसने देश को भ्रष्टाचार शासन और विकास करता प्रशासन' दिया है। इससे पहले बॉलीवुड एक्टर नसीरुद्दीन शाह, गिरीश कर्नाड, अमोल पालेकर समेत थियेटर और आर्ट से जुड़ी 600 से ज्यादा हस्तियों ने बीजेपी को वोट ना देने की अपील की थी।



इन सभी ने एक लेटर लिख कर लोगों से अपील की- "वोट डाल कर बीजेपी और उसके सहयोगियों को सत्ता से बाहर करें। " इस मुहीम में अमोल पालेकर, नसीरूद्दीन शाह, गिरीश कर्नाड, एमके रैना और ऊषा गांगुली, लिलेट दुबे, कोंकणा सेन शर्मा, अभिषेक मजूमदार,रत्ना पाठक शाह, उषा गांगुली, अनामिका हासकर,महेश दत्तानी, संजना कपूर, डॉली ठाकोर, और नवतेज जौहर जैसे कई चर्चित चेहरों ने भी ये अपील की है। बताया जा रहा है इन सभी हस्तियों ने कहा है कि भारत और इसके संविधान की अवधारणा खतरे में है। 



12 भाषाओं में तैयार किए गए पत्र में लिखा है,'आने वाले लोकसभा चुनाव देश के सबसे गंभीर चुनाव है। आज गीत, नृत्य, हास्य सहित कला खतरे में है। हमारा संविधान खतरे में है। सरकार ने उन संस्थाओं का गला घोंट दिया है जहां तर्क, बहस और असहमति का विकास होता है। किसी लोकतंत्र को सबसे कमजोर और सबसे अधिक वंचित लोगों को सशक्त बनाना चाहिए।'