PICS - लंबे समय बाद नजर आईं शर्मिला, पदौदी की बेगम साहिबा का पैलेस देखेंगे तो चौंक जाएंगे।

1 months ago




बंगाली ब्यूटी शर्मिला टैगोर आज भी बहुत खूबसूरत दिखती है। वो 74 साल की हो गई हैं। हाल ही में उन्हें करण जौहर की मम्मी के बर्थडे में देखा गया। शर्मिला आज भी उतनी ही खूबसूरत दिखती है। इस उम्र में भी वो काफी फिट है। 




 उनका नाम आते ही जेहन में कश्मीर की कली, अराधना , अमर प्रेम और सत्यकाम जैसी फिल्में याद आती है। सत्यजीत रे जैसे डायरेक्टर के साथ उनका सिनेमा की दुनिया में सफर शुरू हुआ और अपने यादगार फिल्मों की बदौलत वो आज भी याद की जाती हैं। शर्मिला ने पटौदी के नवाब मंसूर अली खान से शादी रचाई थी। शर्मिला पटौदी बेगम साहिबा कहलाती हैं।  हम आपको पटौदी पैलेस की तस्वीरें दिखातें हैं। 



कहा जाता है पटौदी पैलेस की कीमत 800 करोड़ है। शर्मिला टैगोर के परिवार के पास 2700 करोड़ की सम्पति है। टाइगर पटौदी के निधन के पास शर्मिला इसकी देख-रेख करती हैं। 




पिछले साल पटौदी हाऊस में तैमूर का पहला जन्मदिन मनाया गया था। उस पार्टी में करीना परिवार समेत पहुंची थीं। 




पटौदी पैलेस की डिजाइनिंग बहुत बेहतरीन है। पूरे पैलेस को सफेद रंग से रंगा गया है। इसकी वास्तुशैली कनॉट प्लेस की इमारतों से प्रभावित है। 




पटौदी पैलेस में 150 से ज्यादा कमरे हैं। यहां 100 से ज्यादा नौकर चाकर है। पैलेस को बहुत ही खूबसूरती से सजाया गया है। 



पटौदी हाउस हरियाणा के गुरुग्राम से 26 किलोमीटर दूर अरावली की पहाडिय़ों में है। 



अरावली पहाडिय़ों में बसा पटौदी हाउस 200 साल पुराना है। 





 इंडियन क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और पटौदी रियासत के 9वें नवाब मंसूर अली की 2011 में मौत के बाद सैफ अली खान को पटौदी रियासत का 10वें नवाब बना दिया था।






पटौदी पैलेस में फिल्म वीर जारा की शूटिंग हुई थी। फिल्म में इसे प्रीति जिंटा के घर के तौर पर दिखाया गया था। 





इस पैलेस में बहुत सुंदर गार्डन बना हुआ है। साथ ही कई सारे अस्तबल, गैराज और खेल के मैदान बने हुए हैं। 




पटौदी पैलेस किसी आलिशान महल से कम नहीं। पैलेस का इंटीरियर बहुत ही खूबसूरत और एंटीक तरीके से किया गया है। 




पटौदी रियासत की स्थापना 1804 में हुई थी। यह रियासत कापटौदी हाउस के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। आपको बता दें कि मंसूर अली खान को मृत्यु के बाद पटौदी पैलेस में ही दफना दिया था।



 यह भी कहा जाता है कि पटौदी रियासत के पूर्वजों को भी पैलेस के आस-पास ही दफनाया गया था।