बर्थडे स्पेशल- दर्द भरी आवाज़ के मालिक थे मुकेश माथुर

1 years ago

हिंदी फिल्मों में सदाबहार गीतों की गूंज हमेशा रहती है। गोल्डन ऐरा के गाने आज भी लोगों की जुबां पर हैं और ऐसे ही एक सिंगर के गानों ने लोगों के दिल में अलग जगह बनाई। हम बात कर रहे हैं सुरीली आवाज़ के जादूगर मुकेश माथुर की। जिनका आज 94वां जन्मदिन है। अपने सुरीले अंदाज से मुकेश ने कई सालों तक सभी के दिलों पर राज किया। मुकेश ने अपने 40 साल के इस लंबे करियर में करीब 200 से ज्यादा फिल्मों में गाने गाए। मुकेश का जन्म 22 जुलाई 1923 को लुधियाना के जोरावर चंद माथुर और चांद रानी के घर में हुआ। इनका पूरा नाम मुकेश चंद माथुर था। मुकेश की बड़ी बहन संगीत की शिक्षा ले रही थीं और मुकेश ने उन्ही से संगीत के गुड़ों को सीखा। मुकेश ने संगीत की शिक्षा लेनी तो शुरू कर दी थी, लेकिन मुकेश सिंगर नहीं बल्कि एक एक्टर बनना चाहते थे। वहीं मौका मिलने के बाद 2 साल बाद मुकेश मुंबई आए तो उन्हें बतौर एक्टर सिंगर ब्रेक मिला 1941 में आई फिल्म निर्दोष में। मुकेश के लिए इंडस्ट्री में शुरुआती दौर काफी मुश्किलों भरा रहा। मुकेश की आवाज के केएल सहगल मुरीद हो गए। 40 के दशक में मुकेश के गाने का तरीका एकदम हटकर था और उस स्टाइल के भी सभी दीवाने थे। उस दौर में दिलीप कुमार पर मुकेश के कई गाने फिल्माए गए। लेकिन 50 के दशक में मुकेश का जलवा हर जगह हो गया। शौमेन राजकपूर किसी भी फिल्म में होते तो उसी फिल्म में मुकेश गाना गाते। एक तरह से मुकेश को ही राजकपूर की आवाज़ मान लिया गया। राज कपूर और मुकेश बड़ी गहरी दोस्ती थी, दोनों की दोस्ती स्टूडियो तक ही नहीं थी, मुश्किल दौर में दोनों ने एक दूसरे की सहायता की।

साल 1959 में राज कपूर को फिल्म अनाड़ी के फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया और इसी फिल्म के एक गाने के लिए मुकेश को भी यही अवॉर्ड मिला। मुकेश इकलौते ऐसे मेल सिंगर थे जिन्हे पहली बार फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। मुकेश माथुर  ने‘अगर जिंदा हूं मैं इस तरह से’, ‘ये मेरा दीवानापन है’,‘ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना’,‘दोस्त दोस्त ना रहा’जैसे कई गानों को अपनी आवाज दी।

वहीं साल 1974 में फिल्म रजनीगंधा के गाने ‘कई बार यूं भी देखा है’के लिए नेशनल अवॉर्ड मिला और 1976 में फिल्म कभी कभी से ‘कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है’के लिए भी फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। निज़ी जिंदगी में मुकेश को प्यार भी हुआ उन्हें एक गुजराती लड़की इतनी पसंद आई कि उसी से शादी करना चाहते लेकिन परिवार वालों ने मुकेश की बात नहीं सुनी फिर बाद में परिवार वाले भी मान गए उन्होंने सरल अपने जन्मदिल यानि 22 जुलाई 1946 को शादी कर ली। मुकेश का एक बेटा और दो बेटियां हैं।

संगीत के दुनिया के इस बादशाह का निधन 27 अगस्त, 1976 को अमेरिका में एक स्टेज शो के दौरान दिल का दौरा पड़ने से हो गया। उस समय ‘एक दिन बिक जाएगा माटी के मोल, जग में रह जाएंगे प्यारे तेरे बोल’इस गाने को गा रहे थे। भले ही मुकेश आज हमारे बीच नहीं है लेकिन संगीत के इस जादूगर की जादूगरी हमें हमेशा याद रहेगी.

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