अलविदा कह गई बॉलीवुड की वो 'चांदनी', परी की तरह खूबसूरत थी वो, चांदनी के बारे में जानिए दिलचस्प बातें

11 months ago

 

नीतू कुमार - यश चोपड़ा की फिल्म चांदनी में काम करने के बाद श्रीदेवी के करियर ने बुलंदी को छुआ था। इस फिल्म में  श्रीदेवी  ओस की बूंदों जैसी, चांद की चांदनी जैसी, सूरज की किरणों जैसी, किसी बाग के फूलों जैसी नजर आई थी। उनकी  बिखरी जुल्फे, लहराती सिफॉ़न की साड़ियां, स्विटजरलैंड की वो हसीन वादियां, श्रीदेवी की चमकती आंखों ने चांदनी को बहुत खास फिल्म बना दिया। इस फिल्म में यश चोपड़ा ने श्रीदेवी को नायाब खूबसूरती से सजाया । परदे की हीरोइन को परी बना दिया। आम तौर पर हिंदी सिनेमा हीरो के आसपास घूमती है लेकिन य़श जी की फिल्मों में श्रीदेवी को खास तवज्जो दिया गया। फिल्म चांदनी  अप्सरा से कहीं कमतर नहीं लग रही थीं श्रीदेवी। 

अपने दिल्ली से मुंबई के ट्रेन में एक सफ़र के दौरान यश चोपड़ा ने देखा कि हर फ़िल्म के पोस्टर में सिर्फ़ मार-धाड़, ख़ून-ख़राबा ही नज़र रहा है. इस सफ़र में ही उन्होने तय किया कि अपनी अगली फ़िल्म वो 9 गानों से बनाएंगे ।

चांदनी का आगाज़, बस इसी ख़्याल के साथ हुआ । अपने दौर की सबसे बड़ी हिट फ़िल्म उन्होने श्री देवी को अपनी चांदनी के तौर चुना. चांदनी ये नाम हमेशा यश चोपड़ा के ज़ेहन में था, उन्होने अपने ही फ़िल्म की हीरोइन का नाम चांदनी रखा था। ये पहली बार था, जब उन्होने इसे फ़िल्म का नाम दे दिया।

1989 में रिलीज हुई चांदनी एक  रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी जो उस समय सुपरहिट रही थी। फिल्म के गानों को भी काफी पसंद किया गया था। चांदनी ओ मेरी चांदनी, लगी आज सावन की फिर वो झड़ी भी ​काफी पसंद किया गया।

"लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है..." बारिश की फुहारों में श्रीदेवी की ख़ूबसूरती को चार चाँद लगा दिया था । गाने में श्री देवी की खूबसूरत लग रही है। पीली साड़ी में जब भी कोई एक्ट्रेस बारिश में भीगी है वो गाना हमेशा सुपरहिट ही रहा है।

चांदनी के बाद लम्हे में श्री देवी के साथ यश चोपड़ा ने लम्हे बनाई । एक ऐसी कहानी, जिसमें हीरो अपनी प्रेमिका की बेटी से ही मोहब्बत करने लगता है ।

मोहब्बत की इस ये अजीब-ओ-गरीब कहानी भी इतने सलीके से पेश की गई कि लम्हे उस दौर की सबसे ख़ूबसूरत फ़िल्मों में शुमार हुई. और नीता लुल्ला को श्री देवी को संजाने के लिए बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर के नेशनल अवॉर्ड से नवाज़ा गया ।