फ्लैशबैक- जानिए धर्मेन्द्र हेमा की अनसुनी कहानिया और देखिए रेयर तस्वीरें

1 years ago

 

फिल्म 'आसमान महल' के प्रीमियर पर धर्मेन्द्र ने पहली बार हेमा को देखा था और पहली ही मुलाकात में हेमा पर फिदा हो गए थे धर्मेन्द्र। थिएटर के अंदर जब धर्मेन्द्र घुसे तो कॉर्नर वाली सीट पर ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी बैठी हुई थी। हेमा को देखने के बाद अपने खास दोस्त शशि कपूर से धरम पाजी ने कहा था ,''यार ये कुड़ी वाकई चंगी दिखती है।'' तब धर्मेन्द्र ने समझा था साउथ इंडियन हेमा उनकी ये बात नहीं समझ पाएगी. लेकिन हेमा मालिनी पंजाबी में कही धर्मेन्द्र की पूरी बात समझ गई । धरम पाजी अगर हेमा पर फिदा थे तो हेमा का भी वहीं हाल था। उस दौर के हैंडसम हंक धर्मेन्द्र के बारे में उन्होंने बहुत सुन रखा था....मन ही मन वो भी धर्मेन्द्र को बहुत पसंद करती थी। साऊथ से बॉलीवुड में आई हेमा की चाहत थी कि वो धर्मेन्द्र के साथ फिल्मों में काम करे....और जल्द ही उन्हें एक नहीं चार चार फिल्में मिल गई।  

संयोग से इसी साल हेमा मालिनी ने धर्मेन्द्र के साथ 4 फिल्में साइन कीं । हेमा और धर्मेन्द्र की पहली फिल्म थी शराफत और इसी फिल्म के सेट पर साउथ इंडियन ब्यूटी हेमा और पंजाब के पुत्तर धमेन्द्र का प्यार परवान चढ़ा। हालांकि ये फिल्म फ्लॉपस हो गई थी लेकिन इन लव स्टोरी रफ्तार पकड़ चुकी थी ।1971 में आई राजा जानी में धर्मेन्द्र और हेमा की जोड़ी सुपर हिट रही 1972 में धर्मेन्द्र को सीता और गीता का ऑफर मिला। डाइरेक्टर रमेश सिप्पी ने सीता और गीता की कहानी हेमा मालिनी को नजर में रखकर लिखी थी. फिल्म हीरोइन ओरिएंटेड थी, लेकिन धर्मेन्द्र ने सिर्फ हेमा मालिनी की वजह से हीरो की भूमिका कुबूल कर ली। शोले की शूटिंग के दौरान धर्मेन्द्र को हेमा के दूर चले जाने का डर सताता था. इसकी वजह थे जीतेन्द्र. कहा जाता है संजीव कुमार ने अपने दिल की बात हेमा तक पंहुचाने का जिम्मा करीबी दोस्त जीतेन्द्र को दिया था. लेकिन जीतेन्द्र ने वो संदेशा नहीं पहुंचाया. बल्कि इस बहाने खुद जीतेन्द्र को हेमा के करीब जाने का मौका मिल गया. हेमा जीतेन्द्र को पसंद भी करती थीं. ऐसे में धर्मेन्द्र अपनी हीरोइन को हासिल करने का कोई चांस नहीं छोड़ना चाहते थे. 

हेमा संग धर्मेन्द्र की शरारतों से प्रेरित होकर डाइरेक्टर रमेश सिप्पी ने बसंती को बंदूक सिखाने का सीन फिल्म में डाला था. सेट पर धर्मेन्द्र हेमा को शॉट के अलावा भी बसंती कहकर छेड़ते थे. उनकी दीवानगी का पता फिल्म की पूरी यूनिट को था. कहा जाता है हेमा के साथ वाले सीन में धर्मेन्द्र रीटेक कराते थे, ताकि उन्हें हेमा के साथ रहने का मौका मिले. सीन में गड़बड़ी करने के लिए धर्मेन्द्र लाइटमैन्स को 2-2 सौ रुपये भी देते थे. सीन के जितने रीटेक होते, लाइटिंग टीम को उतने ही ज्यादा पैसे देते धर्मेन्द्र 

 हेमा मालिनी का दिल जीतने की कोशिश में धर्मेन्द्र के लिए वरदान साबित हुई आउटडोर शूटिंग. इस दौरान धर्मेन्द्र की मुहब्बत के सबसे बड़े राजदार हुआ करते थे अमिताभ बच्चन. अमिताभ जय का रोल धर्मेन्द्र ने ही दिलवाया था. पहले ये रोल रमेश सिप्पी शत्रुघ्न सिन्हा को देना चाहते थे. अमिताभ स्क्रिप्ट राइटर जावेद अख्तर से शोले की कहानी सुनने के बाद से ही गब्बर या जय का रोल करना चाहते थे. लेकिन रमेश सिप्पी इसके लिए तैयार नहीं थे. तब अमिताभ ने धर्मेन्द्र से सिप्पी साहब को राजी करने को कहा. धर्मेन्द्र के जोर देने पर आखिर रमेश सिप्पी तैयार हो गए स्टारडम की दौड़ में बने रहने की चुनौतियों के बीच धर्मेन्द्र के करियर को मिला ड्रीमगर्ल का सहारा. 70 के दशक की वो हीरोइन, जिनके नाम राजकपूर और देवानंद जैसे हीरोज के ढलते करियर को सपनों का सौदागर और जॉनी मेरा नाम जैसी सुपरहिट फिल्मों से संवारने का क्रेडिट था. धर्मेन्द्र के साथ जब डाइरेक्टर आसित सेन ने हेमा मालिनी को फिल्म शराफत में साइन किया, तब उन्हें भी ऐसे ही करिश्मे की दरकार थी. फिल्म हालांकि उम्मीदों के मुताबिक नहीं चली, लेकिन धर्मेन्द्र के दिल में हेमा के लिए मुहब्बत का सिलसिला शुरु हो गया..

रामनगर में शोले की शूटिंग के दौरान धर्मेन्द्र और हेमा की मुहब्बत की चर्चा बंगलोर से लेकर बंबई तक फैली.लेकिन धर्मेन्द्र तो अबतक हेमा को प्रपोज भी नहीं कर पाए थे. शादी शुदा होने की वजह से धर्मेन्द्र के लिए ये आसान भी नहीं था. कहा जाता है इसी बैचैनी में धर्मेन्द्र रात में ज्यादा शराब पी लेते. एक बार तो शूटिंग के बाद धर्मेन्द्र ने इतनी शराब पी ली, कि उन्हें होश ही नहीं रहा. वो नशे की हालत में सेट से काफी दूर चले गए. पूरी यूनिट रात भर परेशान रही. सुबह धर्मेन्द्र एक पहाड़ी पर सोते हुए मिले. 

 

शोले की रिलीज के बाद धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी की शादी की अटकलें जोर पकड़ने लगीं. अखबारों में हर रोज छपने वाली ऐसी खबरों से हेमा के मां-बाप परेशान थे. इसी बीच उन्होंने हेमा मालिनी की शादी के लिए फिल्म इंडस्ट्री से बाहर लड़का देखना शुरु कर दिया. ये सिलसिला कई महीनों तक चलता रहा. एक दिन तो हेमा ने बगावत ही कर दी. हेमा कभी अपने मां-बाप की इच्छा के खिलाफ नहीं गईं. लेकिन एक रात शूटिंग से लौटने पर मां ने देरी की वजह पूछी, तो हेमा ने नाराज होकर कह दिया- मां, अगर ऐसे ही चलता रहा, तो मैं फिल्मों में काम नहीं करूंगी.

. हेमा मालिनी के परिवार को सिर्फ धर्मेन्द्र की शादी शुदा होने पर आपत्ति थी. वर्ना हेमा के पिता तो जब भी सेट पर जाते, धर्मेन्द्र से बड़ी गर्मजोशी से मिलते. लेकिन उनके रहते हेमा को धर्मेन्द्र से मिलने की इजाजत नहीं थी. चरस फिल्म के दौरान जब हेमा को आउटडोर शूटिंग के लिए जाना पड़ा, तो उनके पिता भी साथ हो लिए. उस दौर में हीरो और हीरोइन एक ही कार में जाते थे. लेकिन हेमा के पिता नहीं चाहते थे धर्मेन्द्र हेमा के साथ बैठे. हेमा के साथ वो पहले ही पिछली सीट पर बैठ जाते. लेकिन धर्मेन्द्र भी कम नहीं थे. वो हमेशा हेमा की साइड वाला गेट खोलकर हेमा के साथ बैठ जाते. इस लाजवाब तरीके पर हेमा के पिता कुछ नहीं बोल पाते थे.

 धर्मेन्द्र से शादी की बात पर अपने मां और बाप को खिलाफ देखकर हेमा ने खुद भी कई बार धर्मेन्द्र से दूर रहने कोशिश की. लेकिन ऐसा कर नहीं पाईं. अपनी बायोग्राफी में हेमा भी ये बात कुबूल करती हैं कि उन्होंने ये सोचकर धर्मेन्द्र से प्यार नहीं किया, कि शादी शुदा शख्स के साथ रिश्ते का अंजाम क्या होगा. वो जब भी अपने सपनों के राजकुमार के बारे में सोचती उसका अक्स धर्मेन्द्र जैसा ही उभरता. धर्मेन्द्र के बारे में लोग कहते थे वो महिलाओं से फ्लर्ट करते हैं, लेकिन हेमा के साथ ऐसा नहीं था. हेमा जानती थी धर्मेन्द्र की मुहब्बत सच्ची है.

मुहब्बत के सुर्खियों के बीच धर्मेन्द्र और हेमा की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कामयाबी की गारंटी साबित हो रही थीं. चरस से लेकर 1977 में ड्रीम गर्ल तक धर्मेन्द्र और हेमा मालिनी की जोड़ी सुपरहिट रही. इसी दौरान हुई एक घटना से दोनों की जिंदगी बदल गई. जुलाई 1978 में पाकिस्तान से आया हेमामालिनी का प्रशंसक रात के अंधेर में उनके बंगले में घुस गया. हेमा के पिता को जब भनक लगी, तो उन्होंने चोर समझकर पीछा किया. इसी दौरान वो सीढ़ियों से गिर पड़े और अस्पताल ले जाते हुए उनकी मौत हो गई. मुसीबत के इस दौर में धर्मेन्द्र हेमा के परिवार के लिए सबसे बड़े मददगार साबित हुए. 

 2 मई 1980. फिल्म इंडस्ट्री में बहुत कम लोगों को पता था कि उस राता हेमा के जुहू बंगले पर क्या होने वाला है. कुछ गिने चुने दोस्तों और करीबी रिश्तेदारों के बीच धर्मेन्द्र हेमा के साथ शादी के बंधन में बंध गए. दोनों की शादी अयंगर रीति रिवाजों से हुई. धर्मेन्द्र और हेमा ने इस शादी की बात कई हफ्तों बाद कुबूल की. इसमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाली जो बात थी, वो ये कि इसमें धर्मेन्द्र के पिता दयोल भी शामिल हुए. 

धर्मेन्द्र की शादी को लेकर उस दौर में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं. कुछ अखबारों में ये रिपोर्ट्स थीं, कि हेमा से शादी के लिए धर्मेन्द्र ने इस्लाम कुबूल कर अपना नाम दिलावर खान रख लिया था. ऐसा इसलिए ताकि पहली पत्नी को तलाक दिए बिना दूसरी शादी हिंदू विवाह कानून के तहत अपराध न साबित हो. लेकिन धर्मेन्द्र और हेमा दोनों ने ही ऐसी खबरों का खंडन किया. उनकी शादी हिंदू रीति रिवाजों के साथ हुई थी और इसका सबूत है दोनों की ये तस्वीर...

80 के दशक में धर्मेन्द्र और हेमा की शादी सबसे आश्चर्यजनक घटना थी. इस दौर में हेमा पर धर्मेन्द्र का बसा बसाया घर तोड़ने का भी आरोप लगा. ऐसी बातों से धर्मेन्द्र का गुस्सा सातवें आसमान पर होता. धर्मेन्द्र के हाथों उस दौर में कई पत्रकारों के पिटने की खबरें भी सुर्खियों में आईं. लेकिन सार्वजनिक तौर पर धर्मेन्द्र के परिवार की तरफ से विरोध का कोई सुर नहीं सुनाई दिया. कहा जाता है इस समझौते के में धर्मेन्द्र के मां-बाप ने बड़ी भूमिका निभाई. वर्ना पहली पत्नी की एक शिकायत पर जेल तक जा सकते थे धर्मेन्द्

 

 

 शादी के बाद हेमा धर्मेन्द्र के बंगले में तो नहीं गईं. उनका बंगला भी जुहू में धर्मेन्द्र के बंगले से कुछ ही दूरी पर था. दोनों परिवारों का एक दूसरे के घर आना जाना आज भी नहीं. लेकिन धर्मेन्द्र दोनों ही बंगलों अपनी मौजूदगी बराबर बनाए रखते. धर्मेन्द्र और हेमा जानते थे, उनकी जिंदगी शादी के बाद एक आम पति-पत्नी की जैसी नहीं रहेगी. लेकिन दुनिया आज भी दाद देती है दोनों परिवारों के बीच अंडरस्टैंडिग की. खासतौर पर धर्मेन्द्र ने जिस तरह दोनों परिवारों में अपनी जिम्मेदारी निभाई. हेमा से शादी के बाद धर्मेन्द्र ने अपने बड़े बेटे सन्नी दयोल को फिल्म बेताब के जरिए लॉन्च करने की तैयारी शुरु कर दी. 

 

 हेमा मालिनी के साथ धर्मेन्द्र का परिवार पूरा हो गया, वक्त के साथ दोनों के रिश्तों के लेकर कहासुनी भी बंद हो गई. लेकिन इसके साथ ही परदे पर इस सुपरहिट जोड़ी का जलवा भी खत्म हो गया. 80 के दशक में हेमा और धर्मेन्द्र की सबसे बड़ी फ्लॉप फिल्म रही रजिया सुल्तान. कमाल अमरोही ने ये फिल्म कई बरस के रिसर्च और तैयारी के बाद बनाई थी. लेकिन उस दौर की सबसे हिट जोड़ी होने के बावजूद ये फिल्म नहीं चली. 1983 के बाद धर्मेन्द्र और हेमा ने साथ फिल्में करनी छोड़ दी. 

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