Love Story - सालों बाद भी गुरूदत्त और वहीदा का वो अफसाना याद करता है जमाना

7 months ago

 

नीतू कुमार - वक्त बदल गया, जिंदगी बदल गई....लेकिन सालों बाद भी गुरूदत्त और वहीदा को वो अफसाना याद करता है जमाना। गुरु दत्त के जन्मदिन 9 जुलाई को उनकी और वहीदा वो प्रेम कहानी सालों बाद भी लिखी पढ़ी जाती है। फिल्म प्यासा की शूटिंग के दौरान गुरू दत्त वहीदा रहमान के इश्क का शुरू हुआ था फसाना।  फिल्म प्यासा की वो गुलाबो जाने कब गुरू दत्त की असल जिंदगी में दाखिल हो गई, खुद उन्हें भी पता नहीं चला। तो वहीं वहीदा भी जमाने से कही आगे सोचने वाले गुरूदत्त के बारे में सोचने पर मजबूर हो गई। ये जानते हुए भी कि गुरू दत्त शादी शुदा है। वहीदा गुरूदत्त की सोच, फिल्म मेकिंग को लेकर उनके जुनून को देख उनकी तरफ खिंचती चली गई। गुरु दत्त के सहयोगी अब्रार अल्वी से बातचीत पर आधारित किताब 10 इयर्स विद गुरू दत्त के मुताबिक अपने टैलेंटेड डायरेक्टर की कायल थी वहीदा....वक्त के साथ दोनों का रिश्ता गहरा होता चला गया।

 

 

गुरुदत्त की जिदगी में जब वहीदा आई वो गीता दत्त के साथ खुशहाल शादीशुदा जिंदगी बिता रहे थे। गीता और गुरू दत्त की पहली मुलाकात 1948 में हुई थी। वहीदा रहमान की तलाश गुरुदत्त ने ही की थी. अपने साथी और स्क्रिप्ट राइटर अब्रार अल्वी के साथ गुरुदत्त हैदराबाद गए थे। उस दौर की सुपरहिट तेलगु फिल्म मिसीअम्मा का कॉपीराइट खरीदने फिल्म के प्रोड्यूसर से बात तो नहीं बनी, लेकिन वहां एक तेलगू फिल्म में वहीदा का आइटम डांस दिल को भा गई। गुरुदत्त ने वहीदा को मुंबई आने को कहा....गुरूदत्त के बुलावे पर वहीदा मुंबई आ गईं। 


स्क्रीन टेस्ट के बाद वो सीआईडी की हीरोइन बन गईं हालांकि गुरुदत्त को उनका नाम पसंद नहीं था लेकिन वहीदा ने बड़े अंदाज के साथ कहा- चाहे जो हो, मैं तो वहीदा रहमान ही रहूंगी,  वहीदा का वो अंदाज स्क्रीन टेस्ट में मौजूद सबका दिल जीत ले गया- बहुत हद तक गुरु दत्त का भी. सीआईडी के पूरा होते होते गुरुदत्त ने ये तय कर लिया कि उनकी अगली फिल्म प्यासा की हीरोइन वहीदा ही होंगी। फिल्म प्यासा में गुलाबो का किरदार वहीदा को दिया गया। वहीदा ने उस रोल को अमर कर दिया ....गुरुदत्त को अपनी इस हसीन खोज पर नाज हो रहा था तो वहीदा अपने साथी एक्टर और डाइरेक्टर की काबिलियत पर फिदा थीं और शायद यही वजह थी- प्यासा के साथ दबी जुबान में दोनों के बीच रोमांस की भी चर्चा होने लगी । फिल्म प्यासा में गुरूदत्त का जो किरदार स्क्रीन पर दिखा....तब ऐसा माना गया कि इसके पीछे उनकी असल जिंदगी की कोई कश्मकश हो सका । प्यासा की कामयाबी के बाद गुरुदत्त ने 1957 में वहीदा रहमान को लेकर एक और फिल्म का ऐलान कर दिया । वो फिल्म थी कागज के फूल। गुरुदत्त का ड्रीम प्रोजेक्ट। फिल्म  की कहानी ऐसे फिल्म डाइरेक्टर की है, शादी-शुदा होते हुए भी अपनी हीरोइन के प्यार में पड़ जाता है. ये ठीक वैसा ही अफसाना था, जो  असल जिंदगी में भी गुरू दत्त के साथ हो रहा था।. 




प्यासा की कामयाबी के बाद वहीदा गुरुदत्त फिल्म्स की पूरी यूनिट के लिए लकी मस्कट हो गई थीं। अब वो वक्त आ गया था कि  वहीदा के बिना किसी फिल्म की कल्पना भी नहीं कर पाते थे गुरुदत्त । इस बात का जिक्र अब्रार अल्बी ने 10 ईयर्स विद गुरु दत्त नाम की किताब में किया है। वहीदा और गरू दत्त की मोहब्बत के गवाह और राजदार थे अब्रार अल्वी। पत्नी गीता दत्त के साथ गलतफहमियां और अनबन जरुरत से ज्यादा बढ़ चुकी थी और वहीदा उनकी जिंदगी में तेजी से जगह बना रही वहीदा रहमान से बढ़ती नजदीकियों के बीच गुरुदत्त और गीता दत्त की शादी-शुदा जिंदगी में तल्खियां शुरु हो गईं- वहीदा से मुहब्बत के साथ वजह कुछ और भी थी. गीता दत्त को कहीं न कहीं इस बात का मलाल था, कि शादी के बाद उनका सिंगिंग करियर वैसे नहीं परवान चढ़ा और इस वजह से घर में तनाव बढ़ता जा रहा था। गुरुदत्त ने सुसाइड की पहली कोशिश प्यासा की शूटिंग के दौरान की ही थी वाइफ से झगड़ें बढ़ने लगे तो उन्हें जिंदगी बेमानी लगने लगी थी। 



गीता दत्त अब पति पर जासूसी भी करने लगी थी।. एक बार तो गीता दत्त ने वहीदा के नाम से गुरुदत्त को चिट्ठी लिख दिया- ''तुमने मुझे दीवाना कर दिया है, मैं पागल हो रही हूं. तुम आज मुझे शाम को नरीमन प्वाइंट पर मिलो. मुझे तुमसे बात करनी है'' इस पर गुरुदत्त को शक हुआ. अब्रार को साथ लेकर गुरुदत्त जब नरीमन प्वाइंट पहुंचे, तो वहां वहीदा की जगह गीता मौजूद थी । वहीदा और गुरुदत्त के रिश्तों का सच जानने के लिए गीता दत्त ने तो एक बार अब्रार अल्वी को ही मोहरा बना लिया. एक दिन अब्रार के घर वो रोते हुए पहुंच गई. तब अब्रार गुरुदत्त के लंदन जाने की तैयारी में थे. गीता को वहीदा रहमान के साथ जाने से एतराज था. लेकिन अब्रार के समझाने पर गीता वापस चली गई। साहिब बीवी और गुलाम की शूटिंग पूरी होते होते वहीदा पर हक जताने की हद तक जा चुके थे गुरुदत्त। परदे पर प्यार भले ही छोटी बहू से था लेकिन असल जिंदगी में वहीदा दिल के करीब होती जा रही थी


गीता समझ गई थी कि गुरू दत्त अब वहीदा से दूरी नहीं बनाने वाले। वहीदा और गुरु दोनों ही अपने रिश्ते को न तो स्वीकार करते थे और न ही इससे इंकार करते थे। वहीं उनके इन रिश्तों से गीता दत्त खफा हो गई थीं। उनका कहना था की गुरु कैसे पति हैं जो अपनी पत्नी से करियर खत्म करने के लिए कह रहे हैं और खुद अपना प्यार दो औरतों में बांट रहे हैं। गुरुदत्त न गीता को छोड़ना चाहते थे न वहीदा को। गीता शराब में डूबती चली जा रही थी...संगीतकारों ने गीता को काम देना बंद कर दिया. गीता कई बार घर छोड़ कर चली जातीं।  और फिर वो दौर आया जब गीता ने गुरू दत्त को ही छोड़ दिया। गुरू दत्त और वहीदा के रिश्तों पर सिर्फ गीता दत्त को ही ऐतराज नहीं था....वहीदा के परिवार  के लोग भी  नहीं चाहते थे कि वो गुरू दत्त से शादी करे।



 गुरू दत्त हिंदू थे और वहींदा मुस्लिम ....ऐसे में वहीदा को भी इस रिश्ते का कोई भविष्य नजर नहीं आ रहा था। गुरू दत्त् से अब गीता दूर रहने लगी थी....एक बार वो लंदन गई और फिर वहां से सीधे कश्मीर चली गई .... गुरुदत्त उन्हें घर बुलाना चाह रहे थे....ऐसे में गीता दत्त ने  तार से ये मैसेज भिजवाया कि घोड़े से गिरने की वजह से उन्हें चोट आई है, इसलिए अभी नहीं आ सकती. तब गुरुदत्त ने अपने एक assistant को गीता का हालचाल लेने भेजा. लेकिन वहां से जो खबर मिली वो गुरुदत्त का दिल तोड़ने वाली थी. गीता को एक खरोंच भी नहीं आई थी ।कश्मीर में उनके रुकने की वजह था एक नौजवान, जिसके साथ दोस्ती के बाद लंदन से सीधे कश्मीर चली गई थीं गीता. उस दिन गुरुदत्त ने अपनी जिंदगी का एक अहम फैसला लिया। 



अपना घर बचाने के लिए 1963 में गुरू दत्त ने वहीदा का साथ छोड़ दिया। जिस वहीदा का साथ गुरुदत्त की जिंदगी के तमाम जख्मों पर मरहम की तरह काम करता था, उस वहीदा को अपनी जिंदगी और फिल्म कंपनी से निकालने का फैसला कर चुके थे गुरु दत्त। गुरू दत्त  अपनी पत्नी गीता को किसी और की बांहों में नहीं देख सकते थे गुरुदत्त. अगले दिन जब वहीदा गुरुदत्त फिल्म्स आई, तो असिस्टेंट ने उनका रास्ता रोक दिया. वहीदा के लिए उस मेक अप रूम में कोई जगह नहीं थी, जो ठीक गुरुदत्त के कमरे के बगल में बना था. वहीदा तो उस दिन रोते हुए लौट गईं. लेकिन तब इसकी वजह समझ में नहीं आई.वहीदा ने भी गुरू दत्त से बातचीत एकदम बंद कर दी। लेकिन गुरूदत्त की गृहस्थी में आई दरार और चौरी होती चली गई । गीता दत्त बच्चों के साथ उनसे अलग रहने लगी थी। गुरू दत्त के लिए अपने बच्चों से मिलना भी मुश्किल हो गया था। 



एक तरफ वहीदा उनकी जिंदगी से दूर चली गई वाइफ गीता दत्त भी सुलह को तैयार नहीं थी। गुरू दत्त की लाइफ में तनाव बढ़ने लगा था। अपने सहयोगियों के सामने बार बार वो जान देने की बात करते थे। कई बार वहीदा रहमान के सामने भी वो मौत को गले लगाने की बात कहते 10 अक्टूबर 1964 की शाम भी अपने करीबी दोस्त अब्रार अल्वी से उन्होंने कुछ ऐसा ही कहा था.....उस रात गुरू दत्त ने जरूरत से ज्यादा शराब पी ली.....और नींद की गोलियों को ओवर डोज ले लिया और 11 अक्टूबर की सुबह गुरू दत्त अपने अपार्टमेंट में मरे हुए पाए गए। बॉलीवुड के लिए ये दिल दहला देने वाली घटना थी। लोग सन्न थे....गुरू दत्त ने ऐसा क्यों किया..कोई इसे खुदकुशी कहता तो कोई एक हादसा...लेकिन गुरू दत्त के सहयोगी अबरार अल्वी इसे खुदकुशी ही मानते थे। इसका जिक्र उन्होंने किताब टेन इयर्स विद गुरू दत्त में भी किया है। 


गुरूदत्त ने खुदकुशी की.या फिर शराब के नशे में नीद की गोलियों के ओवरडोज से उनकी जान गई..इस पर बहस होती रही...गुरुदत्त का जाना हिंदी सिनेमा के लिए एक झटका था खुद वहीदा रहमान को भी बहुत सदमा लगा था ...गुरदत्त की मौत के बाद वहीदा ने एक स्टेटमेंट जारी किया था। स्टेटमेंट में उन्होंने कहा, “ऊपरवाले ने उन्हें सबकुछ दिया था लेकिन संतोष नहीं। वो कभी संतुष्ट नहीं होते थे।  शायद इसीलिए जो चीज उन्हें जिंदगी नहीं दे पा रही थी, उसे उन्होंने मौत में तलाशा।  उन्हें पूर्ण संतुष्टी की तलाश थी। कोई तृप्ति, कोई मौत, कौई अंत, कोई पूर्णता वह चाहते थे। मुझे नहीं पता उनकी मौत दुर्घटना थी या घटना, लेकिन इतना जानती हूं, उन्हें कोई नहीं बचा सकता था। उनमें बचने की चाह ही नहीं थी। मैंने उन्हें कई बार समझाने की कोशिश की कि जिंदगी में सब कुछ नहीं मिल सकता और मौत हर सवाल का जवाब नहीं है। मगर वे नहीं माने। 



मैं जानती हूं वो मौत से मोहब्बत करते थे, बेपनाह मोहब्बत, इसलिए उन्होंने इसे गले लगा लिया। असफल शादी....अधूरा प्यार और फ्लॉप फिल्मेंगुरु दत्त के तनाव का कारण थी । जिंदगी की परेशानियों से जंग नहीं लड़ सके गुरू दत्त .और हिंदी फिल्मों का ये चमकता सितारा सिर्फ 40 साल की उम्र में अलविदा कह गया। तो वहीं वहीदा की यादों में हमेशा के लिए बसे रहे गुरू दत्त। गुरू दत्त की मौत के 10 साल बाद 1974 में वहीदा ने शादी की....फिल्म शगुन के कोस्टार कमलजीत सिंह से। वहीदा की शादीशुदा जिंदगी कामयाब रही....लेकिन गुरू दत्त और वहीदा का प्यार नाकाम रहा.....पर इस मोहब्बत में इतनी तासीर थी कि जब-जब वहीदा रहमान का नाम आता है जो जेहन में अपने आप ही गुरुदत्त की यादें ताजा हो जाती हैं।