कादर खान अफगानिस्तान से इंडिया आए थे, बेटे के साथ कनाडा में रहते थे, देखिए परिवार की तस्वीरें

2 weeks ago

बॉलीवुड दिग्गज एक्टर कादर खान नहीं रहे। 81 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। कादर खान का जन्म साल 1935 में अफगानिस्तान के काबुल में हुआ था। बंटवारे के बाद कादर परिवार के साथ भारत आकर बस गए। कहा जाता है कि कादर खान का बचपन बड़ी ही गरीबी में बीता। ज़माने भर की शोहरत हासिल होने से पहले कादर ख़ान ने ज़िंदगी के बहुत सारे इम्तिहान दिए हालात से दो-दो हाथ किए?  ज़िंदगी का सौतेलापन झेलकर - गरीबी का सामना करके - कादर ख़ान ने वो मकबूलियत हासिल की, जो गिने-चुनों को ही मिलती है...

 कादर खान के तीन बेटे हैं। उनके एक बेटा कनाडा में रहता है और ऐसा कहा जाता है कि कादर खान के पास कनाडा की भी नागरिकता है। कादर खान का बचपन बड़ी ही गरीबी में बीता। उनके पास पहनने के लिए चप्पल तक नहीं होती थी। 

कादर खान ने कॉलेज में एक प्ले किया था। जिससे दिलीप कुमार इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने कादर खान को अपनी दो फिल्मों 'सगीना' और 'बैराग' के लिए साइन कर लिया।

उनकी अदाकारी की खूबी ये ती कि वो हर किरदार को ऐसे निभाते, जैसे उसी के लिए बने हों। कूली और वर्दी का ख़तरनाक विलेन हो.कर्ज़ चुकाना है और जैसी करनी - वैसी भरनी में - दिल छू लेने वाले किरदार हों या फिर वो कॉमेडी कैरेक्टर्स, जिसमें उनका कोई सानी ही नहीं था।

वो मुंबई के इंजीनियरिंग कॉलेज में सिविल इंजीनियरिंग प्रोफेसर थे। एक्टिंग के शौक ने थियेटर की ओर खींचा...कादर खान ने साल 1973 में पहली फिल्म 'दाग' में नजर आए थे। इस फिल्म में कादर खान वकील की भूमिका में थे। करीब 300 फिल्मों में अदाकारी कर चुके कादर ख़ान ने हिंदी और उर्दू में 250 फिल्मों के डायलॉग भी लिखे । यहां तक कि राजेश खन्ना और मुमताज की साल 1974 में आई फिल्म 'रोटी' के लिए कादर खान ने ही डायलॉग लिखे थे। इस काम के लिए कादर खान को 1 लाख 21 हजार रुपए दिए गए थे।

फिल्मों के अलावा कादर खान ने टीवी इंडस्ट्री में भी अपना हाथ आजमाया। कादर खान एक कॉमेडी शो लेकर आए थे जिसका नाम हंसना मत था। इस सीरियल में कादर खान के अलावा शगुफ्ता अली, अंजू महेन्द्रू और हिमानी शिवपुरी भी थीं।  अमिताभ बच्चन की कई फिल्मों के अलावा कादर खान ने 'हिम्मतवाला', 'कुली नंबर वन', 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी', 'खून भरी मांग', 'कर्मा', 'सरफरोश' और 'धर्मवीर' जैसी कई सुपरहिट फिल्में कीं। 

आखिरी बार साल 2015 में उनकी आख़िरी फिल्म दिमाग़ की दही आई... तब अमिताभ बच्चन ने उनके कमबैक का ऐलान किया था.। उस दौरान फिल्म इंडस्ट्री से कादर ख़ान के लिए पद्म पुरस्कार की मांग भी उठी... लेकिन बढ़ती उम्र और शरीर की बीमारी के चलते वो कनाडा अपने बेटे के पास चले गए और अब वो ख़बर आई वो दुनिया में नहीं रहे।