ऐसा लगता है तुसॉड्स म्यूजिम में मधुबाला कभी भी जाग उठेंगी !

1 years ago

मैडम तुसॉड्स वैक्स म्यूज़ियम के लिए दिल्ली में अनारकली के अंदाज़ में मधुबाला की मूरत से परदा हटा तो जैसे थम गई निगाहें और मधुबाला की छोटी बहन - मधुर निहारती रह गईं अपनी उस बहन को - दुनिया जिसे खूबसूरती की देवी कहती थी। हिदुस्तान में पहली बार किसी सेलिब्रटी को उसकी रुख़्सती के सालों बाद - मोम में ढाला गया है.और मधुबाला की इस मूरत को बनाने में तो मैडम तुषाड्स के दिग्गजों के भी होश उड़ गएं। 

आम तौर पर मोम की मुरत बनाने के लिए - हर शख़्स के शरीर के हर हिस्से का माप लिया जाता है । बालों के सेंपल लिए जाते हैंचेहरे की बारीक से बारीक लकीरों को मापा जाता है और फ़िर उसे मोम में ढाला जाता है। लेकिन मधुबाला के मोम की मूरत के लिए ये सहुलियत नहीं थी, क्योंकि मधुबाला खुद नहीं थी। नतीजा ये हुआ कि अनारकली की सूरत में मधुबाला को हु-ब-हू बनाने के लिए उनके घरवालों की मदद ली गई। मधुबाला की हज़ारों तस्वीरों को रिफरेंस में रखा गया ताकि हर एंगल से उनकी बारीक से बारीक डिटेल को नोट किया जा सके उनके पुराने इंटरव्यूज़ और फ़िल्में इकट्ठा की गईं ताकि मेकअप और बगैर मेकअप की तस्वीरों का फर्क समझ आएऔर सबसे बड़ी बात तो ये कि मधुबाला के पुराने कपड़ों तक की मदद ली गई... ताकि इस मोम की मूरत की माप बिल्कुल मधुबाला जैसी हो। तब कहीं जाकर - इस मोम की मूरत को ये सूरत मिली है कि इस देखने वाले दंग हैं।

20 से ज़्यादा आर्टिस्ट 4 महीने का वक्त और तकरीबन 1 साल की रिसर्च तब कहीं जाकर - मधुबाला को दोबारा - ज़िदा कर दिया गया है। सबसे यादगार किरदार, सबसे खूबसूरत चेहरा और वो भी दिल्ली में... यानि आपको मधुबाला का दीदार करने लंदन नहीं जाना । वो मधुबाला, जिन्हे ज़िंदगी ने मोहब्बत में मायूसी दी वो मधुबाला, जो जन्मते ही - दिल में एक छेद लेकर आईं और वो मधुबाला, जिनके जाने के 48 साल बाद भी - उन्हे कोई भूल ना सका। अब वही मधुबाला - मोम में बदल गई हैं मधुबाला उस दौर की पहली फ़िल्मी हस्ती हैंजिनके वैक्स म्यूज़ियम से में सजाया गया है। 

48 साल पहले दिल की बीमारी ने मधुबाला से उनकी सांसे छीन ली थीं। मधुबाला की ज़िंदगी में उनके करीब लोग रहे लोग कहते हैं कि खूबसूरती की उस मल्लिका को उसके दिल की बीमारी ने नहीं, बल्कि उसके ग़मों ने मार डाला उसके टूटे दिल ने ख़त्म कर दिया। मधुबाला का दिल टूटा। उनके दिल के छेद ने उनकी सांसे रोक दीं...लेकिन मधुबाला, हमेशा अपने चाहने वालों के दिलों में ज़िंदा रही हैं। दिल्ली के मैडम तुषाड वैक्स म्यूज़ियम में मधुबाला का पुतला - इस बात का सुबूत होगा।

 

 

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