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71 साल के हुए महेश भट्ट, दूसरी शादी के लिए महेश भट्ट ने बदला था धर्म

Sept. 20, 2019, 12:02 a.m.

महेश भट्ट का जन्‍म बॉम्‍बे में हुआ था। उनके पिता का नाम नानाभाई भट्ट और मां का नाम शिरीन मोहम्‍मद अली है। भट्ट के पिता गुजराती ब्राह्मण थे और उनकी मां गुजराती शिया मुस्लिम थीं। उनके भाई मुकेश भट्ट भी भारतीय फिल्‍म निर्माता हैं। उनकी स्‍कूली पढ़ाई डॉन बोस्‍को हाई स्‍कूल, माटुंगा से हुई थी। स्‍कूल के दौरान ही उन्‍होंने पैसा कमाने के लिए समर जॉब्‍स शुरू कर दी थी। 

उन्‍होंने प्रोडक्‍ट एडवरटीजमेंट्स भी बनाए। उन्‍होंने किरन भट्ट (लॉरेन ब्राइट) से शादी की थी जिनसे उनकी मुलाकात स्‍कूल के दौरान ही हुई थी। इनके दो बच्‍चे हैं- पूजा भट्ट और राहुल भट्ट। 

उनके किरन के साथ रोमांस से ही प्रेरित होकर उन्‍होंने फिल्‍म 'आशिकी' बनाई लेकिन शुरूआती करियर में आई कठिनाईयों और परवीन बॉबी से चले उनके अफेयर की वजह से यह शादी ज्‍यादा दिनों तक नहीं टिक पाई।

 बाद में भट्ट अभिनेत्री सोनी राजदान के प्‍यार में पड़ गए और उनसे शादी कर ली। इस शादी के लिए महेश ने मुस्लिम धर्म कबूल कर लिया था। फिलहाल महेश मुस्लिम हैं। इनके भी दो बच्‍चे हैं- शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट। 26 साल की उम्र में भट्ट ने निर्देशक के तौर पर फिल्‍म 'मंजिलें और भी हैं' से अपना डेब्‍यू किया।

 इसके बाद 1979 में आई 'लहू के दो रंग' जिसमें शबाना आजमी और विनोद खन्‍ना मुख्‍य भूमिका में थे, इसने 1980 के फिल्‍मफेयर अवार्ड्स में दो पुरस्‍क‍ार जीते। फिल्‍म ने बॉक्‍स ऑफिस पर औसत से ऊपर प्रदर्शन किया। उनकी पहली बड़ी हिट 'अर्थ' थी। इसके बाद उनकी 'जानम' और 'नाम' को भी काफी पसंद किया गया।

 ऐसा कहा जाता है कि इन फिल्‍मों से उन्‍होंने अपने व्‍यक्तिगत जीवन को पर्दे पर उकेरने की कोशिश की। फिल्‍म 'सारांश' को भी लोगों ने काफी पसंद किया और अनुपम खेर के जीवन की भी यह अहम फिल्‍म रही। 

सारांश को 14वें मॉस्‍को इंटरनेशनल फिल्‍म फेस्टिवल में भी एंट्री मिली थी। 1987 में वे निर्माता बन गए जब उन्‍होंने अपने भाई मुकेश भट्ट के साथ मिलकर 'विशेष फिल्‍मस' नाम से अपना प्रोडक्‍शन हाऊस शुरू कर दिया। 

हिन्‍दी फिल्‍म इंडस्‍ट्री के वे जाने माने निर्देशक बन गए जब उन्‍होंने डैडी, आवारगी, आशिकी, दिल है कि मानता नहीं, सड़क, गुमराह जैसी फिल्‍में दीं।