बर्थडे स्पेशल - मनोज कुमार के भारत कुमार बनने की कहानी

1 years ago

 

नीतू कुमार : बॉलीवुड में जब भी देश प्रेम की बात की जाती है तो सबसे पहले याद आते है मनोज कुमार। अपने देश के लिए मर मिटने की भावना को हिंदी सिनेमा के परदे पर मनोज कुमार ने एक दो बार नहीं बल्कि कई बार दिखाया तभी तो मनोज कुमार भारत कुमार कहलाने लगे । मनोज कुमार के  भारत कुमार बनने की  कहानी शुरू होती है 1963 से।  तबके एक बड़े डायरेक्टर ने मनोज कुमार को शहीद फिल्म का प्रपोजल दिया। फिल्म का किरदार था शहीद भगत सिंह ।  कहते हैं कि इस फिल्म के किरदार को निभाने के लिए मनोज कुमार शहीद भगत सिंह के परिवार से मिले. भगत सिंह को करीब से जाननेवालों से मिले । इन सबका असर मनोज कुमार पर ऐसा पड़ा कि उन्होंने प्रतिज्ञा की कि वो अपनी फिल्मों से देशभक्ति का संदेश देंगे और उन्होंने किया भी ऐसा ही इसीलिए उन्हें सिनेमा में भारत कुमार के नाम से जाना गया.

भगत सिंह के किरदार में मनोज कुमार दर्शकों के दिलों में घर कर गए। यहां तक कि तत्कालीन प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री भी उनसे बहुत प्रभावित हुए  और उन्हें फिल्म उपकार बनाने की प्रेरणा दी । 1967 में बनी फिल्म उपकार पुरी तरह से देश प्रेम की भावना से सराबोर फिल्म थी और देशभक्ति पर बनी ये फिल्म कर्मिसयली सक्सेसफुल भी रही । इस फिल्म ने मनोज कुमार को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार दिलाया। मनोज कुमार को मेरे देश की धरती' गाने से नई पहचान भी दिलाई। इसके बाद तो जैसे मनोज कुमार के दिल में बरसों से हिलौरें ले रहा देशप्रेम जाग उठा और जन्म हुआ सुपरहिट फिल्म पूरब और पश्चिम बनाई 

देशभक्ति की खुशबू फिल्म पूरब और पश्चिम में ऐसी डाली कि आज भी मिस्टर भारत का वो तराना आजादी के जश्न पर बजता है । मनोज कुमार के दिल में आजादी की क्रांति का जज्बा भी था और उन्होंने 80 के दौर में मल्टी स्टारर फिल्म  क्रांति बनाई । भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की कहानी बयान करती फिल्म क्रांति की सफलता का अंदाजा, इस बात से लगाया जा सकता है कि उन दिनों में 1.5 करोड़ की लागत से बनी इस फिल्म ने, बॉक्स ऑफिस पर 10 करोड़ से भी ज्यादा का बिजनेस किया था।

देश पर मर मिटने की भावना हमेशा ही मनोज कुमार की फिल्मों में रही और यही वजह है कि भारत कुमार बॉलीवुड के सबसे बड़े देशभक्त कहलाएं मनोज कुमार ने हिन्दी सिनेमा का रुख देशभक्ति की तरफ किया और आजाद भारत के युवाओं को देशप्रेम के लिए प्रेरित किया । मनोज कुमार ने अपने करियर में 50 से अधिक फिल्मों में काम किया..साथ ही कई फिल्मों का डायरेक्शन भी किया..लेकिन बढ़ती उम्र के कारण वो धीरे धीरे फिल्मों से दूर हो गए औरउम्र के 78वें पड़ाव पर मनोज कुमार को सिनेमा में उनके योगदान का फल मिला। साल 2016 में उन्हें दादा साहब अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। 

 

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