8 साल की उम्र में नंदा के पिता गुजर गए, घर का खर्चा चलाने के लिए फिल्मों में काम करना पड़ा

1 week ago

 

नंदा हिंदी सिनेमा की उन एक्ट्रेस में से एक थी जो अपनी ख़ूबसूरती के अलावा अपनी एक्टिंग के लिए भी तारीफें बटोरती गई। 8 जनवरी 1939 को मुंबई में एक मराठी फैमिली में नंदा का जन्म हुआ था। महज़ 8 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया। लीजेंड्री डायरेक्टर वी शांताराम नंदा के मामा थे और उन्होंने ही नंदा को अपनी फिल्म "तूफ़ान और दिया" में पहला ब्रेक दिया। 

शुरूआती दौर में नंदा की इमेज सिर्फ बहन और भाभी के रोल तक ही सिमट कर रह गई थी... लेकिन जल्द ही "हम दोनों" में नंदा को देव साहब की हीरोइन बनने का मौका मिला... आगे जाकर उन्होंने देव आनंद के साथ "तीन देवियां" जैसी सुपरहिट फिल्म में भी काम किया।

 

नंदा की जोड़ी शशि कपूर के साथ सबसे ज़्यादा पसंद की गई... दोनों ने 8 फिल्मों में साथ काम किया... लेकिन फिल्म "जब जब फूल खिले" इन दोनों के ही करियर की सबसे बड़ी हिट साबित हुई... ये फिल्म उस दौर की म्यूज़िकल ब्लॉकबस्टर बनी और आज भी इसके गाने हिट है.। 1965 में रिलीज़ हुई "ग़ुमनाम" की कामयाबी ने नंदा को टॉप हीरोइन्स की लिस्ट में ला खड़ा किया

. राजेश खन्ना के साथ "इत्तेफाक" में उनकी एक्टिंग को क्रिटिक्स ने बेहद पसंद किया... काका के ही साथ नंदा नज़र आई सस्पेंस थ्रिलर फिल्म "द ट्रेन" में जो कि बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही... फिल्म के सारे गाने सुपरहिट रहे... ख़ासकर "गुलाबी आंखें" ने तो पॉपुलैरिटी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे।

70 के दशक के आख़िरी में अपनी फिल्मों के फ्लॉप होने पर नंदा कैरेक्टर रोल्स प्ले करने लगी थी... इनमें "आहिस्ता-आहिस्ता", "मज़दूर" और "प्रेम रोग" जैसी फिल्में थी... नंदा को हमेशा ही लीक से हटकर कैरेक्टर प्ले करने के लिए जाना जाता रहा। 25 मार्च 2014 को दिल का दौरा पड़ने से नंदा का निधन हो गया। नंदा अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनके यादगार किरदार और फिल्में हमेशा फैंस  के दिल में उन्हें जिंदा रखेंगी।