रानी पद्मावती की कहानी में कितनी सच्चाई है, जानिए

1 years ago

आजकल देशभर में फिल्म पद्मावती पर संग्राम छिड़ा है। रानी पद्मावती और सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की कहानी पर आजकल बहस छिड़ी हुई है। कोई कह रहा है कि  पद्मावती राजपूती आन-बान और शान के प्रतीक चित्तौड़गढ़ की महारानी थीं तो कोई उन्हें लोक कथाओं की एक किरदार मान रहा है । आज हम आपको रानी पद्मावती की पूरी कहानी बताएंगे। और ये भी बताएंगे कि आखिरी पद्मावती कि इस कहानी के वो कौन से हिस्से हैं..जिस पर है विवाद, और कौन सी बात ऐसी है जिस पर किसी को कोई ऐतराज नहीं है। 

 साल 1303 में अलाउद्दीन खिलजी दिल्ली का सुल्तान था और वो आस-पास के तमाम राज्यों को जीतने में जुटा था। 1301 में उसने मेवाड़ के रणथम्भौर के किले पर कब्जा किया था..और इसके बाद उसकी नजर चित्तौड़ पर थी। उस दौरान राणा रतन सेन चित्तौड़गढ़ के राजा थे। राजा रतन सेन के शासन में प्रजा सुखी थी...लेकिन उनकी सैन्य ताकत अलाउद्दीन खिलजी के मुकाबले कमजोर थी। मलिक मोहम्मद जायसी ने अपने महाकाव्य पद्मावत में रानी पद्मिनी या रानी पद्मावती को चित्तौड़गढ़ की महारानी बताया है। जायसी के मुताबिक पद्मावती राजा  रतन सेन की पत्नी थीं। जो बला की खूबसूरत थीं। 

रानी पद्मावती को ऐसी महारानी माना जाता थाजो प्रजा की खुशी के लिए दिन रात जुटी रहती थीं। चित्तौड़गढ़ और पूरे मेवाड़ में तब राजा-रानी का डंका बजता था। लेकिन तभी एक गद्दार ने चित्तौड़ की सुख शांति को ग्रहण लगा दिया। ये चित्तौड़गढ़ के राज दरबार का ज्योतिषी राघव चेतन था। जिसे राजा रतन सेन ने झूठ बोलने की सजा देते हुए दरबार से बाहर कर दिया था।

राघव चेतन दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी से जा मिला और उसके सामने रानी पद्मिनी की खूबसूरती का जमकर बखान किया। चित्तौड़ के इस गद्दार ने खिलजी को उकसाते हुए कहा कि रानी पद्मावती को आप जैसे सुल्तान के पास रहना चाहिए। रतन सेन इसके लायक नहीं। पद्मावत के मुताबिक शुरू में अलाउद्दीन खिलजी इसके लिए तैयार नहीं था लेकिन रानी पद्मावती की खूबसूरती की पूरी कहानी सुनकर वो उसे पाने के लिए बेचैन हो गया। इसके बाद अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़ के राजा रतन सेन के पास अपना दूत भेजा। दूत ने राजा से कहा कि खिलजी चाहते हैं कि आप - रानी पद्मावती को उन्हें सौंप दें। लेकिन चित्तौड़ के राजपूत राजा ने इससे साफ इनकार कर दिया। 

पद्मावत के मुताबिक अलाउद्दीन खिलजी.. राजा रतन के इनकार करने पर भड़क उठा..और उसने रानी पद्मावती को हासिल करने के लिए चित्तौड़ पर हमला बोल दिया। पद्मावत के मुताबिक अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तौड़गढ़ के किले को चारों तरफ से घेर लिया। यहां जमकर कत्ले आम मचाया। यहां जबर्दस्त जंग हुई। अलाउद्दीन खिलजी ने यहां खूब कत्ले-आम मचाया। लेकिन फिर भी अलाउद्दीन  खिलजी चित्तौड़गढ़ के किले में घुस नहीं पाया। इसके बाद उसने बड़ी चाल चली। उसने धोखे से राजा रतन सेन को बंदी बनाने की साजिश रची। अलाउद्दीन खिलजी का दूत राजा रतन सेन के पास पहुंचा...उसने कहा कि अगर आफ सुल्तान को शीशे के जरिए रानी पद्मावती को एक बार  दिखा दें तो वो वापस दिल्ली लौट जाएंगे..और चित्तौड़ बच जाएगा। पद्मावत के मुताबिक शुरू में साफ इनकार करने के बाद...राजा रतन सेन ने आखिरकार ये शर्त मान ली। 

चित्तौड़ का ये वही जल महल है जायसी के मुताबिक जहां अलाउद्दीन खिलजी ने आईने में रानी पद्मावती को देखा था..और देखते ही वो सुध-बुध खो बैठा। चित्तौडगढ़ के राजा को यकीन था कि रानी पद्मावती को शीशे में देखने के बाद सुल्तान खिलजी वापस लौट जाएगा..लेकिन उसने धोखा दिया । अलाउद्दीन खिलजी को यकीन था कि अब उसे रानी पद्मावती को पाने से कोई नहीं रोक सकता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

कहते हैं कि खिलजी की सेना के किले के अंदर घुसने से पहले ही रानी पद्मावती ने हजारों राजपूत कन्याओं के साथ जोहर कर लिया। रानी पद्मावती  ने अग्निकुंड में खुद को जला डाला..लेकिन खिलजी को जीते-जी खुद तक पहुंचने नहीं दिया। कहते हैं कि जब अलाउद्दीन खिलजी अपनी सेना के साथ किले के अंदर घुसा...तो अंदर सिर्फ राख थी। वहां चारों तरफ सन्नाटा था।

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