Film Review - इरफान खान के फैन हैं तो जरूर देखिए 'करीब-करीब सिंगल'

1 years ago

 

 

 

फिल्म : करीब-करीब सिंगल 

डायरेक्टर : तनुजा चंद्रा

स्टार्स : इरफान खान, पार्वती और नेहा धूपिया 

रेटिंग - 3 स्टार 

रिव्यू : नीतू कुमार 

इरफान खान की फिल्म करीब करीब सिंगल सिनेमा घरों में आ गई है। करीब-करीब सिंगल एक रॉम कॉम और ट्रैवेल फिल्म है। इरफान खान के डायलॉग्स इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है। लंबे समय बाद तनुजा चंद्रा ने डायरेक्शन की कमान संभाली है। तनुजा पहले वो भट्ट कैंप से जुड़ी हुई थी और अलग तरह की फिल्में बनाती रही हैं। तमन्ना, संघर्ष और दुश्मन जैसी फिल्में उनके खाते में हैं।  करीब करीब सिंगल के जरिए उन्होंने अच्छी वापसी की है। तनुजा आमतौर पर गंभीर फिल्में बनाती रही है लेकिन इस बार उन्होंने अपना जॉनर बदला है। रोमांस, कॉमेडी और यात्रा पर आधारित है करीब-करीब सिंगल। 

 

कहानी -   35 साल की जया ( पार्वती)  के पति आर्मी में थे और वो शहीद हो चुके हैं । अपना अकेलापन दूर करने के लिए जया को एक साथी की तलाश है। ऑनलाइन डेटिंग साइट के जरिए जया की मुलाकात  योगी ( इरफान ) से होती है। योगी जिंदादिल और मस्तमौला इंसान है। बातूनी और बिंदास योगी में जया की दिलचस्पी बढ़ जाती है। जया और योगी में मुलाकातें होने लगती हैं। बड़बोला योेगी जया के सामने अपनी पूर्व प्रेमिकाओं की कहानियां सुनाता है और कहता है कि उसके लिए वो आज भी रोती होंगी। इरफान जया से कहता है कि वो उसके साथ उसकी एक्स गर्लफ्रेंड्स से मिलने चले। इरफान की पुरानी गर्लफ्रेंड्स का हाल जानने के लिए निकल पडते हैं । इस सफर के दौरान जया और योगी के बीच एक नया रिश्ता पनपता है ।

 

खासियत - इरफान खान एक्टिंग नहीं करतें। हर रोल को जीते हैं। इस फिल्म में भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है।  उऩका अंदाज, उनकी शायरी, उनके  डायलॉग्स फिल्म की जान है । जब भी स्क्रीन पर आते है तो हॉल में बैठे दर्शकों को खूब हंसाते हैं। पार्वती अपना रोल निभाने में परफेक्ट रही है। इरफान के साथ उनका तालमेल अच्छा दिखता है। नेहा धूपिया, ईशा श्रावणी, नवनीत निशान और ब्रिजेंद्र काला ने भी प्रभावित किया है ।  फिल्म में गाने कहानी की रफ्तार को आगे  बढ़ाते है और इस मामले तनुजा चंद्रा की तारीफ करनी होगी। फिल्म का कैमरावर्क भी गजब का है। इरफान और पार्वती की यात्रा वाले सीन अच्छे दिखते हैं। गंगटोक और ऋषिकेश के लोकेशन बहुत खूबसूरत लगते हैं। फिल्म का फर्स्ट हाफ काफी मजेदार है लेकिन सेंकड हाफ में कहीं-कहीं फिल्म बोझिल लगती है।  फिल्म के कई सीन्स  जरूरत से ज्यादा लंबे हैं।  फिल्म एक खास वर्ग को पसंद आएगी । युवा वर्ग शायद ही फिल्म से जुड़े लेकिन अगर आपको इरफान पसंद हैं तो जरूर देखिए करीब-करीब सिंगल । हमारी तरफ से फिल्म को 3 स्टार । 

 

 

 

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