रफी का जब लता-किशोर से हुआ विवाद

1 years ago

 

रफी और लता जी की जुगलबंदी ने कई हिट गाने दिए लेकिन 60 के दशक में रफी साहब का लता मंगेश्कर से विवाद भी काफी सुर्खियों में रहा था. दोनों की जोड़ी युगल गीतों में सबसे ज्यादा सराही गई. लेकिन तब बहुत कम लोगों को पता चला, कि आखिर रफी साहब ने लता के साथ गाना क्यों बंद कर दिया. ये सिलसिला 4 साल तक चलता रहा. इसकी वजह थी गानों को लेकर मिलने वाली गायकों की रॉयल्टी

1961 में फिल्म माया के इसी गीत की रिकार्डिंग के दौरान लता और रफी के मतभेद सामने आए. इससे पहले रॉयल्टी के मसले पर दोनों के बीच आमने-सामने की बातचीत नहीं हुई थी. जबकि फिल्म के संगीतकार सलील चौधरी समेत कई गायक और  लता मंगेश्कर के साथ आ चुके थे. रिकार्डिंग के बाद जब लता जी ने रफी साहब से उनकी राय पूछी, तो उन्होंने साफ मना कर दिया. तब लता जी ने उसी स्टूडियो में ऐलान किया- आगे से मैं रफी साहब के साथ कोई गीत नहीं गाऊंगी. लता जी नाराज होकर चली गईं. तब रफी साहब मुस्कराकर रह गए थे. जैसे उन्हें यकीन था- सुरों का रिश्ता यूं झटके में नहीं टूटा करता. 

लता और रफी साहब के बीच अनबन 4 साल बाद दूर हुई नरगिस की कोशिशों से. 1965 में नरगिस के एक चैरिटी कंसर्ट में लता जी और रफी साहब दोनों शामिल थे. दर्शकों की फरमाइश हो रही थी दोनों के युगल गीत की. तब नरगिस दोनों का हाथ खींचकर स्टेज पर लाईं थी. रिश्ता सुरों का था. मंच पर साथ आए, तो तमाम मतभेद भूलकर एक सुर में बहने लगे. 

लता मंगेश्कर की तरह किशोर कुमार से भी रफी की अनबन की खबरे 60 के दशक के आखिरी बरसों में सुर्खियों में रही थी. अराधना में जब रफी को हटाकर किशोर कुमार से गीत गवाए गए, तब इसे दोनों के बीच होड़ के रूप में देखा गया. लेकिन इसकी वजह थी एसडी बर्मन की अचनाक मौत। अराधना के जिन गीतों से राजेश खन्ना रातों रात सुपरस्टार बन गए, उसे गाने के लिए एसडी बर्मन ने मो. रफी को ही चुना था. लेकिन उनकी मौत के बाद बेटे आरडी बर्मन ने अराधना की कमान संभाल ली. तब तक अराधना के दो गीत रफी की आवाज में रिकार्ड हो चुके थे. बाकी के गीत आरडी बर्मन ने अपने दोस्त किशोर कुमार से गवाए। 

रफी के साथ आरडी बर्मन का रिश्ता अराधना से भी पहले का था। आरडी ने अपनी पहली फिल्म तीसरी मंजिल के गीत रफी से ही गवाए थे. उसके बाद कई फिल्मों में उनकी आवाज रिपीट की लेकिन अराधना में गाए रफी के मुकाबले किशोर कुमार के गीतों की लोकप्रियता ने सुरों का समीकरण बदल दिय. किशोर कुमार बर्मन कैंप के लीड सिंगर हो गए। रफी को अभिमान जैसी फिल्मों में इक्का-दुक्का गीत ही मिलते लेकिन उसी एक गीत को रफी अपनी आवाज में यादगार बना देते इस दौर में हीर रांझा जैसी फिल्में भी आईं, जिसके हर गीत में रफी की आवाज जैसे जादू करती है। लेकिन 70 के दशक में राजेश खन्ना और अमिताभ की आवाज किशोर बन गए थे और रफी को किशोर के मुकाबले कम काम मिल रहा था।  

 

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