74 साल की हुईं सायरा बानो, कभी शादीशुदा राजेन्द्र कुमार से शादी करने की जिद्द पकड़ बैठी थीं !

5 months ago

नीतू कुमार - सायरा बानो का 23 अगस्त को जन्मदिन होता है। सायरा बानो का जन्म 23 अगस्त 1944 को मसूरी में हुआ था। सायरा की मां नसीम बानो थीं।  60 के दशक में सायरा बॉलीवुड की ब्यूटी क्वीन कहलाती थीं। 

सायरा ने उस दौर में राजेन्द्र कुमार के साथ कई फिल्मों में काम किया था।

उस दौर की ज्यादातर लड़कियां राजेन्द्र कुमार जैसे हैंडसम हसबैंड की कामना करती थी। देखा जाए तो बॉलीवुड में 60 का पूरा डिकेड राजेन्द्र कुमार के नाम था। बॉलीवु़ड हर बड़ी हीरोइन उनके साथ काम करना चाहती थी। राजेन्द्र कुमार शादीशुदा तब भी उनपर फिदा हो जाती थी बॉलीवुड हसीनाएं । 

उस दौर में नाजुक सी सायरा बानो खूबसूरती की मिसाल थी और जब राजेन्द्र कुमार ने फिल्म आई मिलन की बेला में सायरा के साथ काम किया तो वो उनपर फिदा हो गए। बॉलीवुड के जुबली कुमार पर सायरा का दिल भी आ गया, राजेन्द्र कुमार शादीशुदा थे और दो बच्चों के पापा भी। साय़रा राजेन्द्र कुमार से शादी की जिद्द पकड़े हुए थी तो वहीं राजेन्द्र भी सायरा की खातिर अपना परिवार तक छोड़ने को तैयार थे। 

राजेन्द्र कुमार और सायरा बानों ने एक साथ आई मिलन की बेला, झुक गया आसमान और अमन जैसी फिल्मों में साथ काम किया था। सायरा फिल्म दर फिल्म राजेन्द्र कुमार की दीवानी होती चली गई.एक बार अपने बर्थडे पर वो इसलिए रूठ गईं, कि उनकी मां ने राजेन्द्र कुमार को नहीं बुलाया तब नसीम बानो ने दिलीप कुमार को खबर भेजी कि वो आकर अपनी फैन सायरा को समझाएं-बुझाएं । 

सायरा की मां नसीम को अपनी बेटी की नादानी पर बेहद गुस्सा आ रहा था। वो नहीं चाहती थी कि उनकी बेटी एक शादीशुदा शख्स से शादी करे। इस मामले में नसीम ने पड़ोसी दिलीप साब की मदद ली और उनसे कहा कि सायरा को वे समझाए कि वो राजेन्द्र कुमार से दूर हो जाए । बेमन से दिलीप कुमार ने यह काम किया क्योंकि वे सायरा के बारे में ज्यादा जानते भी नहीं थे और शादी का तो दूर-दूर तक इरादा नहीं था। 

जब दिलीप साहब ने सायरा को समझाया कि राजेन्द्र के साथ शादी का मतलब है पूरी जिंदगी सौतन बनकर रहना और तकलीफें सहना। तब पलटकर सायरा ने दिलीप साहब से सवाल किया कि क्या वो उनसे शादी करेंगे? सायरा के इस सवाल से अकचकचाए दिलीप उस समय तो कोई जवाब नहीं दे पाए। लेकिन बाद में बहुत सोच विचाप कर वो सायरा बानो से शादी को तैयार हो गए और फिर इस तरह राजेन्द्र कुमार का परिवार टूटने से बच गया था।