58 साल के हो गए संजू बाबा, देखिए संजय दत्त का फैमिली अलबम

1 years ago

 

29 जुलाई 1959 को नरगिस और सुनील दत्त के घर आया एक नन्हा मुन्ना शहजादा। मम्मी पापा ने बड़े प्यार से नाम रखा संजय दत्त। घर में लोग संजय दत्त को संजू बाबा बुलाने लगे।  अपने मम्मी के बहुत लाडले थें संजय दत्त। घर के पहले बच्चे थे लिहाजा लाड़ प्यार भी खूब मिला.लेकिन इसका नतीजा ये हुआ कि संजय जिद्दी होने लगे।

 एक बार जो जिद्द कर ली उसे पूरा करवाने बगैर नहीं मानते थेसंजय दत्त के बचपन की कहानी  उनके पापा ने कुछ यू सुनाई थी। , ''हमारी फैमिली इटली गई हुई थी। मुझे और नर्गिस को एक जरूरी मीटिंग करनी थी वहां संजय ने घोड़ा गाड़ी देखा और फिर जिद्द कर बैठे कि उन्हें फौरन बैठना है घोड़ा गाड़ी पर। हमने कहां थोड़ी देर बाद घोड़ा गाड़ी पर बैठेंगे उसके बाद तो संजय वहीं सड़क पर लोटने लगे।  आते जाते लोग उसे देखे जा रहे थे और हमें खराब लगता रहा। संजय इस कदर जिद कर बैठे कि उस मेहमान ने हमें कहां कि क्यों ना हम घोड़ा गाड़ी में बैठकर ही मीटिंग कर ले।''

 

संजू बाबा जब घर में ज्यादा शैतानी करने लगे तो उन्हें बोर्डिंग स्कूल भेज दिया गया। ताकि वहां वो ढंग से पढ़ाई लिखाई करे।  संजय की पढ़ाई लिखाई कसौली के लौरेंस स्कूल में हुई। संजय बोर्डिंग स्कूल तो चले गए लेकिन घर की उन्हें बहुत याद आती थी। मम्मी नर्गिस दत्त भी उनसे मिलने अक्सर जाया करती थी। मां नर्गिस दत्त के बहुत दुलारे थे संजय। पापा सुनील दत्त ज्यादा लाड़ प्यार ना दिखाने को कहते थे तब नर्गिस यहीं कहती कि एक ही तो बेटा है मेरा। 

बचपन से ही एक तरफ संजय दत्त जिद्दी थे तो दूसरी ओर बड़े रहम दिल भी थे। मम्मी ने बड़े प्यार से संजय को एक कीमती जैकेट दिया था.लेकिन  एक बार रास्ते में जब ठंड से ठिठुरते हुए एक बच्चे को उन्होंने देखा तो वो जैकेट उसे दे दी। एक बार संजय दत्त अपनी मम्मी के साथ स्कूल से घर आ रहे थे। रास्ते में गाड़ी एक मिल्क बूथ पर रोकी गई ....तभी नर्गिस के ड्राइवर ने एक छोटे बच्चे को गाड़ी में स्क्रैच लगाने पर क्या डांटा संजय दत्त ड्राइवर से नाराज हो गए और बुरी तरह रोने लगे। संजय तभी माने जब उस बच्चे को दुबारा ढूंढ कर लाया गया और उसे बादाम वाला दूध पिलाया गया।  

संजय दत्त को बोर्डिंग भेजा तो गया था अच्छी पढ़ाई लिखाई के लिए वहां संजय बुरी संगति में पड़ गए थे। मम्मी नर्गिस को जब इसकी खबर लगी तो वो बहुत दुखी रहने लगी। उन्हें संजय की फिक्र वक्त सताती थी। जब नर्गिस पैन क्रियाज कैंसर ट्रीटमेंट के लिए अमेरिका गई तब उन्होंने बेटी नम्रता से संजय का ख्याल रखने को कहा था । नर्गिस ने बेटी नम्रता को लिखा था। ,'' संजू का ध्यान रखना। देखनो वो फिर से उन गलत लड़को की दोस्ती में ना पड़ जाएं। संजय थोड़ा नासमझ है उसे इस बात की जरा भी समझ नहीं है कि वो क्या कर रहा है और फिर खुद को नुकसान पहुंचा लेता है।'' संजय जब 12 साल के थे तब उन्होंने पहली बार कैमरे का सामना किया। 1972 में आई थी  फिल्म रेशमा और शेरा। इस फिल्म में संजय दत्त चाइल्ड कव्वाली सिंगर के तौर पर दिखे। 

नर्गिस बेटे संजय दत्त को एक बड़ा स्टार बनते देखना चाहती थी। संजय 1981 में फिल्म रॉकी से ल़ॉन्च हुए। उनकी पहली फिल्म सुपर हिट रही। लेकिन अफसोस मां नर्गिस दत्त फिल्म के प्रीमियर से पहले ही चल बसी। 7 मई को फिल्म का प्रीमियर था और 3 मई को ही नर्गिस की डेथ हो गई। नर्गिस हर हाल में फिल्म के में शामिल होना चाहती थी...भले से उन्हें स्ट्रेचर  पर ही क्यों ना ले जाया जाए लेकिन उनका सपना पूरा हो ना सका... इसलिए फिल्म के प्रीमियर पर नर्गिस के लिए एक सीट छोड़ दी गई थी। 

 

 

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