SelfieWithDaughter: आहत एक्ट्रेस श्रुति सेठ की खुली चिट्ठी देश के नाम

3 years ago

नई दिल्ली(3rd July): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम #SelfieWithDaughter मुहिम का ज़िक्र किए जाने के बाद जहां इसे भारी समर्थन मिला, वहीं सोशल मीडिया पर कुछ तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिलीं। ऐसी ही एक आलोचनात्मक टिप्पणी करने पर एक्ट्रेस श्रुति सेठ को ट्विटर पर काफ़ी बुरा-भला सुनने को मिला। दरअसल श्रुति ने ट्वीट में लिखा था कि सेल्फी से बदलाव नहीं सुधारों से होगा। कृपया कोशिश कीजिए और फोटोग्राफ़ से बड़ा बनिए।

श्रुति के इस ट्वीट के बाद उन्हें ट्वीटर पर ट्रॉल कर खूब निशाना साधा गया। इसके बाद श्रुति ने कहा कि ये देश महिलाओं के लिए है ही नहीं। श्रुति ने अपने सारे ट्वीट भी हटा लिए।

लेकिन आहत श्रुति सेठ ने देश के नाम 'ट्वीटलॉन्गर' पर खुली चिट्ठी लिखी है। आप भी पढ़िए...

भारत के नाम एक छोटा नोट

मैं यह पूरे देश के लिए लिख रही हूं, क्योंकि किसी एक व्यक्ति को एक अरब लोगों के नजरिए को बदलने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। बदलाव तभी हो सकता है जब व्यक्तिगत स्तर पर जागरुकता होगी। 28 जून की सुबह मैंने एक बड़ी गलती की कि मैंने हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आशीर्वाद से शुरू हुए #selfiewithdaughter अभियान के बारे में अपने विचार व्यक्त कर दिए। ज्यादातर लोग इसे कन्‍या भ्रूण हत्‍या रोकने पर जागरूकता के लिए एक शुभ संकेत मानते हैं। इस बात को ध्यान में रखते हुए कि मेरी भी 11 महीने की एक बेटी है, मुझे दुःख के साथ यह विचार बिल्कुल पसंद नहीं आया। लेकिन मैं उस व्यक्ति से इन सतही पहलों से कुछ ज्यादा की उम्मीद करती हूं, जिसे बदलाव के इस समय को इस दिशा में आगे ले जाना है।

मैंने इसके बाद और बड़ी गलती की कि इस राय को ट्विटर पर पोस्ट कर दिया। इसलिए मैंने बिल्कुल भी नहीं सोचा, मैंने अपनी राय को सबके सामने रखने की हिम्मत भी दिखाई। इसके बाद तो शेक्सपीयर के जमाने की तरह सुनाई देने के जोखिम पर मेरे लिए नरक के दरवाजे खोल दिये गये। मुझे लेकर नफरत भरे ट्वीट्स की सूनामी आ गई। 48 घंटे तक बिना रुके ट्रॉलिंग चलती रही। ट्वीट्स में मुझे, मेरे परिवार को, मेरे 'मुस्लिम' पति और 11 महीने की एक बेटी और यहां तक कि मेरे बतौर एक्टर न के बराबर, घटते और बेकार करियर को निशाना बनाया गया। मैंने प्रधानमंत्री के बारे में एक पसंद ना आने वाली टिप्पणी कर दी और उन्हें 'सेल्फी ऑबसेस्ड' कह दिया और उन्हें 'तमाशे' की जगह सुधार चुनने को कह दिया तो क्या मैं गलत थी? तो क्या प्रत्यक्ष रूप से मैं उनके समर्थकों और सरकार के लिए बहुत कठोर थी?

बिना कोई सवाल- क्या एक टैक्स पेयर इलेक्टोरेट के सदस्य के रूप में मुझे उनकी नीतियों पर कुछ कहने का अधिकार ही नहीं था। मैंने उनकी अथॉरिटी को चुनौती देने का साहस कर दिया था। मैंने देश के सबसे बड़े दफ्तर का अपमान कर दिया था। (जो हालांकि, वास्तव में राष्ट्रपति का है।)और इसलिए मुझे सजा मिलनी चाहिए थी। और सजा इसी तरह से मिलनी चाहिए थी। महिलाओं और पुरुषों ने मेरे बारे में सबसे खराब बाते कहीं। उन्होंने मेरी- किसी की बेटी, पत्नी, मां और एक महिला होने की हर प्रतिष्ठा को उतार कर रख दिया। जो पुरुष, अपनी बेटियों के साथ अपनी सेल्फी को हैशटैग करने में व्यस्त थे उन्होंने मुझे वन मिनट...(अपमानजनक शब्द) कहा। उन्होंने कहा कि क्या मै जानती हूं कि मेरे असली पिता कौन है? मुझसे पूछा गया कि क्या बचपन में मेरा यौन शोषण हुआ था जो अब मुझे अपने पिता के साथ सेल्फी से परहेज है? और ये तो तुलना में उदार हैं। वेल डन जेंटलमैन। तुम्हारी बेटियां बहुत गर्व करेंगी। महिलाएं जो एक दूसरे को सशक्त करने के लिए मानी जाती हैं, उन्होने पूछा कि क्या मैं एक प्रॉस्टीट्यूट थी और क्या अब मैं भी अपनी बेटी के साथ यही करने की योजना बना रही हूं। पूछा गया कि क्या मैं अपने असफल करियर को संभालना चाहती हूं इसके लिए नाम हासिल करने के लिए प्रधानमंत्री के नाम इस्तेमाल कर रही हूं।

आखिर बेटियों की सेल्फी लेने का मतलब ही क्या है जब आप खुद उनके लिए बड़े होने के लिए सबसे ज्यादा जहरीला वातावरण बनाने के लिए जिम्मेदार हैं। एक फोटो लेने से स्त्रियों के प्रति द्वेष और पुरुषों का अधिपत्य नहीं हट जाएगा, जो हमारे समाज में गहराई से धंसा हुआ है। उनकी संख्या बढ़ाने के लिए चिंता क्यों करते हो जब उनके साथ इस तरह से अपमानित और जलील करते हो? जिन लोगों ने भी मुझे लगातार 48 घंटो तक ट्रॉल किया, क्या एक बार रुककर सोंच सकते हो कि मैं भी किसी की बेटी हूं। क्या आपने कभी सोंचा कि आपको कैसा लगता अगर इस तरह की नफरत को पाने वाली आपकी बेटी होती। मैं अनुमान लगा रहीं हूं कि इसका जबाब एक बड़ा 'ना'है। क्योंकि आपको पता है कि आप अपनी #selfiewithdaughter के लिए कैमरे के लिए तैयार होने में और उसपर 'लाइक्स' और 'आरटी' पाने में व्यस्त थे।

हमारे ऊर्जावान प्रधानमंत्री के लिए मुझे इतना ही कहना है।

डियर सर, अगर आप महिलाओं को सच में सशक्त करना चाहते हैं। तो मैं आपसे, आपके नाम पर फैली इस तरह की नफरत की निंदा करने के लिए निवेदन करती हूं। अफसोस के साथ मैंने प्रतिक्रिया पर अपने पहले के ट्वीट्स डिलीट कर दिए हैं। लेकिन मैं अभी भी अपनी बात पर अडिग हूं। और मैं इसे दोहराऊंगी: "सेल्फीस बदलाव नहीं लातीं। सुधार लाते हैं। इसलिए कृपया कोशिश करें और एक तस्वीर से बड़े बनें। कम ऑन।" इस पहल के लिए जैसी राय मेरी पहली थी कि यह केवल आंसू बहाने के सिवा और कुछ नहीं है, मैं इसपर यह देखकर बेहद दुखी हूं कि आखिर में मैं सही साबित हुई।

 

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