शम्मी कपूर को कभी भूला नहीं पाओगे....

1 years ago

14 अगस्त ....ये वो तारीख है जिसने हमसे हमारा जिंदादिल एक्टर को छीन लिया। शम्मी कपूर को गुजरे हुए 6 साल हो गए है। 14 अगस्त 2011 को शम्मी कपूर का मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया था। 

 

शम्मी कपूर वो सितारा थे जिनकी रोशनी से बॉलीवुड का फलक कई सालों तक दमकता रहा। हिंदी सिनेमा में 60 के दशक को अपनी सुपर हिट फिल्मों से याहू कपूर ने गोल्डेन पीरियड बना दिया था ।जब जब वो फिल्मी परदे पर आए एक सुपर हिट फिल्म दे गए। 

शम्मी कपूर के रूप में बॉलीवुड को एक ऐसा एक्टर मिला, जिसमें जोश, शरारत, चुलबुलापन होने के साथ साथ बगावती तेवर भी थे । उस समय के हीरोज की इमेज से अलग उन्होंने ऐसे रोल निभाए जो मुश्किलों का सामना करता था और समाज के पुरानी परंपराओ को दरकिनार करते हुए अपनी मंजिल तक पहुंचने का प्रयास करता था।हैंडसम शम्मी कपूर का पर्दे पर विद्रोही तेवर था। अपने साथ के सभी हीरोज से अलग अंदाज के साथ वह एक ऐसे राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद की तिकड़ी के बीच अपनी अलग छवि बनाना आसान नहीं था लेकिन शम्मी कपूर ने अपनी अलग स्टाइल इजाद की। जो सबसे अलग थी और इसी वजह से उनकी कई फिल्मों ने बॉक्स आफिस पर गोल्डेन जुबली मनायी।  

कार ड्राइविंग, फैशन और इंटरनेट के शौकीन शम्मी कपूर ने एक्टिंग की शुरूआत पृथ्वी थियेटर से की थी.  उनकी पहली फिल्म जीवन ज्योति थी जो फ्ल़ॉप हो गई..थी। शम्मी के लिए .शुरूआती सफर आसान नहीं रहा और कई फिल्में एक साथ फ्लॉप हुई। शम्मी कपूर को एक साथ दो चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था. एक ओर उन्हें बॉलीवुड में अपने पैर जमाने थे वहीं पापा पृथ्वीराज कपूर और बड़े भाई राज कपूर से अपनी अलग पहचान भी बनानी थी. स्ट्रगल के दिनों में उन्होंने गीता बाली से शादी कर ली थी । गीता बाली ने उन्हें काफी सपोर्ट किया और आखिरकार: नासिर हुसैन की फिल्म तुमसा नहीं देखा को कामयाबी मिली ।

इसके बाद तो शम्मी कपूर ने हिट फिल्मों की झड़ी लगा दी। शम्मी कपूर का फिल्मी  सफर करीब 15 साल तक जारी रहा और इस दौरान उन्होंने 'दिल देके देखो', 'जंगली', 'दिल तेरा दीवाना', 'प्रोफेसर', 'चाइना टाउन', 'राजकुमार', 'कश्मीर की कली', 'जानवर', 'तीसरी मंजिल', 'ब्रह्मचारी', 'अंदाज' जैसी सुपर हिट फिल्में दी। शम्मी कपूर की सफलता के पीछे उनकी अलग स्टाइल, मोहम्मद रफी के सुपर हिट गाने, खूबसूरत लोकेन्शन्स और एक अच्छी रोमांटिक कहानी होती थी। 60 के दशक में शम्मी रोंमास का दूसरा नाम बन गए थे। आज शम्मी हमारे बीच नहीं है लेकिन उनकी यादें, उनकी बेहतरीन फिल्में, उनका वो जिंदादिल अंदाज उन्हें हमेशा हमारे जेहन में रखेगा । ये सौ फीसदी सच है कि हम शम्मी को कभी भूला नहीं पाएंगे।

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