आज है यश जी की पांचवी पुण्यतिथि, पर्दे पर परियों सी खूबसूरत दिखती थी उनकी फिल्मों की हीरोइन

1 years ago

नीतू कुमार -  हिंदी सिनेमा के दिग्गज फिल्मकार यश चोपड़ा की आज पांचवी पुण्यतिथि है। 21 अक्टूबर 2012 को डेंगू की वजह से य़श चोपड़ा का निधन हो गया था। यश जी हिंदी सिनेमा में रोमांटिक फिल्में बनाने के लिए मशहूर रहें। देखा जाए तो ओस की बूंदों जैसी, चांद की चांदनी जैसी, सूरज की किरणों जैसी, किसी बाग के फूलों जैसी होती थी य़श चोपड़ा की हीरोइन....बिखरी जुल्फे...लहराती सिफॉ़न की वो साड़ियां ...स्विटजरलैंड की वादियों में वो रोमानियत....ये सब य़श चोपड़ा की फिल्मों में ही तो दिखता था। आज हिंदी सिनेमा के उस फिल्मकार का जन्मदिन है जिसने सिनेमा की हीरोइन नायाब खूबसूरती से सजाया....जिसने परदे की हीरोइन को परी बना दिया...। आम तौर पर हिंदी सिनेमा हीरो के आसपास घूमती है लेकिन य़श जी की फिल्मों में हीरोइन को खास तवज्जो दिया गया। चाहे वो सिलसिला की रेखा हो, फिल्म कभी - कभी की राखी, चांदनी की श्रीदेवी , डर फिल्म की नायिका जूही या फिर वीर जारा की प्रिटी जिंटा य़श चोपड़ा की फिल्म की नायिकाएं अप्सरा से कहीं कमतर नहीं होती थी।

 ख़ूबसूरती को ज़रा हटके दिखाने का अंदाज़ यश जी की सबसे बड़ी ख़ूबी रही । फ़िल्म वक्त में उन्होने तब की मशहूर अदाकारा साधना को कुछ इस तरीके से पेश किया कि हर दिल की धड़कन बढ़ गई.साधना यश जी के ख़्वाबों की हीरोइन थी... उन्ही के साथ यश चोपड़ा ने अपनी हीरोइनों को सजाना-संवारना शुरू किया.वक्त में उन्होने साधना को कुछ यूं सजाया कि मानों उनके फ़िल्म की ये हीरोइन... इस जहां से नहीं आसमां से उतरी हो। 

जाने कितने ही किरदार किए रेखा ने, मगर ये किरदार रेखा की ज़िंदगी का वो ख़ूबसूरत फ़ूल बन गया, जिसे वो अपनी ज़िंदगी की क़िताब में हर वक्त सहेज कर रखना चाहती हैं हांलाकि सिलसिला के कामयाब होने की बहुत सारी और वजहें भी हैं। मगर रेखा के लिए....बस ये एक ऐसा जादू है, जो ना उससे पहले हुआ.ना उसके बाद । 

अपने दिल्ली से मुंबई के ट्रेन में एक सफ़र के दौरान यश चोपड़ा ने देखा कि हर फ़िल्म के पोस्टर में सिर्फ़ मार-धाड़, ख़ून-ख़राबा ही नज़र रहा है. इस सफ़र में ही उन्होने तय किया कि अपनी अगली फ़िल्म वो 9 गानों से बनाएंगे । चांदनी का आगाज़, बस इसी ख़्याल के साथ हुआ । अपने दौर की सबसे बड़ी हिट फ़िल्म उन्होने श्री देवी को अपनी चांदनी के तौर चुना. चांदनी ये नाम हमेशा यश चोपड़ा के ज़ेहन में था, उन्होने अपने ही फ़िल्म की हीरोइन का नाम चांदनी रखा था। ये पहली बार था, जब उन्होने इसे फ़िल्म का नाम दे दिया।

चांदनी के बाद लम्हे में श्री देवी के साथ यश चोपड़ा ने लम्हे बनाई. एक ऐसी कहानी, जिसमें हीरो अपनी प्रेमिका की बेटी से ही मोहब्बत करने लगता है । मोहब्बत की इस ये अजीब-ओ-गरीब कहानी भी इतने सलीके से पेश की गई... कि लम्हे उस दौर की सबसे ख़ूबसूरत फ़िल्मों में शुमार हुई. और नीता लुल्ला को श्री देवी को संजाने के लिए बेस्ट कॉस्ट्यूम डिज़ाइनर के नेशनल अवॉर्ड से नवाज़ा गया ।

90 के दशक  में...कहा जाने लगा कि जिस हीरोइन को यशराज बैनर की फिल्म नहीं मिली, उसका करियर पूरा नहीं हुआ. । यश चोपड़ा ने अपनी हीरोइन के पहनावे पर ही नहीं, बल्कि बोलने-हंसने और चलने तक पर काम करना शुरू किया. इन फ़िल्मों के साथ शिफॉन साड़ियों का क्रेज़ बढ़ता चला गया। स्विटज़रलैंड हिंदुस्तान का सबसे बड़ा टूरिस्ट स्पॉट बन गया...दौर बदलता रहा लेकिन यश चोपड़ा की हीरोइन्स का ख़ुमार चढ़ता ही रहा । दिल तो पागल है में माधुरी को उन्होने माया बनाया...ऐसी माया, जिसकी मासूमियत को हर कोई दिल में बसा ले..इस फ़िल्म को लेकर माधुरी से अपनी हर मुलाकात में यश चोपड़ा बस यही कहते - कि तुम मेरी माया हो...

जूही चावला भी यश चोपड़ा की फ़िल्मों में खुलकर खिली और महक़ीं..चांदनी में जूही का रोल छोटा सा था.लेकिन डर में... जूही को किरण बनाकर.... यश चोपड़ा ने डर और मोहब्बत का ऐसा अफ़साना गढ़ा, कि जूही चावला के करियर में वो मील का पत्थर बन गया। 

ये सिलसिला बस यश चोपड़ा की फ़िल्मों तक ही नहीं रहा.यशराज फ़िल्म्स का अंदाज़ ही ऐसा हो गया...आदित्य चोपड़ा ने जब अपने करियर की पहली फ़िल्म - दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे बनाईं तो काजोल का किरदार गढ़ने में इस बात का ख़ास ख़्याल रखा गया कि सिमरन के किरदार में वही जादू बरकरार रहे.ऐसा हुआ भी... सिमरन की सादगी ने करोड़ों दिलों पर दस्तक दी...और फ़िर हमेशा-हमेशा के लिए उन दिलों में अपना घर बना लिया।

दिल तो पागल है के य़श जी ने अपनी फिल्मों में अक्सर नए नए चेहरों को मौका दिया...जब उनकी पसंदीदा नायिका रहीं रेखा श्रीदेवी माधुरी और काजोल का दौर खत्म हुआ तब उन्होने दुनिया की सबसे खूबसूरत महिला का खिताब अपने नाम करने वाली ऐश्वर्या राय को चुना फिल्म मोहब्बतें में । साल 2000 में यश चोपड़ा के बेटे आदित्य चोपड़ा ने मोहब्बतें नाम की फिल्म बनाई । इस फिल्म में मेघना यानि ऐश्वर्या राय पर्दे पर आई। सिफॉन की साड़ी और ऐश्वर्या की खूबसूरती ने मोहब्बतें फिल्म को और खूबसूरत बना दिया। 

दिल तो पागल है को डायरेक्ट करने के बाद यश चोपड़ा ने 7 साल बाद फिल्मों में वापसी की और साल 2004 वो वीर जारा के लिए डायरेक्टर की कुर्सी पर बैठें तो इस बार उनकी पसंद बनी प्रीति जिंटा । फिल्म में उन्होने प्रीति जिंटा को एक पाकिस्तानी लड़की जारा की भूमिका में पेश किया और ना सिर्फ प्रीति की अदाकारी को बल्कि उनकी खूबसूरती को भी अलग ही अंदाज में दिखाया जिससे ये फिल्म प्रीति के करयिर की सबसे सफल फिल्म साबित हुई  

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